"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

फ़ॉलोअर

मंगलवार, 11 अगस्त 2009

‘‘वो तो बेदिल रहे, हम तो बा-दिल हुए’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)


जीते जी मेरे घर वो ना दाखिल हुए।

मेरी मय्यत में ही वो तो शामिल हुए।।


बाट तकते रहे, ख्वाब बुनते रहे,

उनकी राहों से काँटे ही चुनते रहे,

जान बिस्मिल हुई, फूल कातिल हुए।

मेरी मय्यत में ही वो तो शामिल हुए।।


हम इधर से गये, वो उधर हो गये,

जिनके कारण जगे, वो मगर सो गये,

हमने उनको पुकारा, वो गाफिल हुए।

मेरी मय्यत में ही वो तो शामिल हुए।।


दिल धड़कता रहा, साँस चलती रही,

मन फड़कता रहा, आस पलती रही,

हम तो अव्वल रहे वो ही बातिल हुए।

मेरी मय्यत में ही वो तो शामिल हुए।।


अन्त में मिलने आये वो बा-कायदा,

अब तो आने से कोई नही फायदा,

वो तो बेदिल रहे, हम तो बा-दिल हुए।

मेरी मय्यत में ही वो तो शामिल हुए।।

17 टिप्‍पणियां:

  1. दिल धड़कता रहा, साँस चलती रही, मन फड़कता रहा, आस पलती रही, हम तो अव्वल रहे वो ही बातिल हुए।

    toooooo good ....! badhai Sweekaare Janaab...!

    जवाब देंहटाएं
  2. जीते जी मेरे घर वो ना दाखिल हुए।
    मेरी मय्यत में ही वो तो शामिल हुए।।
    बाट तकते रहे, ख्वाब बुनते रहे,
    उनकी राहों से काँटे ही चुनते रहे,
    जान बिस्मिल हुई, फूल कातिल हुए।
    मेरी मय्यत में ही वो तो शामिल हुए।।

    क्या बात हैं.... उत्तम अभिव्यक्ति। साधू!!

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत खूबसूरती से कहे गये भाव
    बेहतरीन

    जवाब देंहटाएं
  4. अत्यन्त सुंदर भाव के साथ आपने इस ग़ज़ल को पेश किया है जो बहुत ही अच्छा लगा! बहुत खूब!

    जवाब देंहटाएं
  5. शुक्र मना लीजिये...मैयत में तो शामिल हुआ..!!

    जवाब देंहटाएं
  6. बहुत कमाल की रचना. शुभकामनाएं.

    रामराम.

    जवाब देंहटाएं
  7. मयंक जी।
    इस बढ़िया गजल के लिए,
    शुभकामनाएँ।

    जवाब देंहटाएं
  8. मयंक जी।
    गजल बहुत खूबसूरत है।
    दिल को छू गई।
    बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  9. bahut hi dilkash gazal likhi hai........ik aah si nikal gayi...........shandar........badhayi

    जवाब देंहटाएं
  10. बहुत सुन्दर रचना
    दिल धड़कता रहा, साँस चलती रही, मन फड़कता रहा, आस पलती रही, हम तो अव्वल रहे वो ही बातिल हुए।
    लाजवाब बधाई

    जवाब देंहटाएं
  11. जीते जी मेरे घर वो ना दाखिल हुए।
    मरे तो मय्यत में आके शामिल हुए।
    बाट तकते रहे, ख्वाब बुनते रहे
    उनकी राहों से काँटे ही चुनते रहे,
    जान बिस्मिल हुई, फूल कातिल हुए।

    बहुत ही सुन्दर . बधाई!

    जवाब देंहटाएं
  12. WOW!! amazing ... u indeed have the art to write and have got amazing thoughts.

    जवाब देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails