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सोमवार, 3 जनवरी 2022

गीत "आ गया नव वर्ष फिर से" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

सुप्त भावों को जगाने,

आ गया नव वर्ष फिर से।

जश्न खुशियों का मनाने,

आ गया नव वर्ष फिर से।

--

प्रीत की पसरी खुमारी देश में,

लग रहा है शीत भारी देश में,

कामनाएँ उमड़ती फिर से पुरातन,

भावनाएँ लग रही हैं आज नूतन,

नवल भावों को जगाने,

आ गया नव वर्ष फिर से।1।

--

करीने से सब सँवरते आज तो,

झूमकर सब नृत्य करते आज तो,

देश में-परदेश में आनन्द है,

सादगी परिवेश में अब मन्द है,

पश्चिमी गंगा बहाने,

आ गया नव वर्ष फिर से।2।

--

जिधर देखो उधर भारी भीड़ है,

कोसता महलों को नन्हा नीड़ है,

मन्दिरों में लग रहीं लम्बी कतारे,

जोर से बजने लगे घंटे-नगारे,

कलुषता मन की मिटाने,

आ गया नव वर्ष फिर से।3।

--

पर्वतों पर हो रहा हिमपात है,

सूर्य को देता कुहासा मात है,

बँट रहा नववर्ष का उपहार है,

सर्दियों में धूप से ही प्यार है,

मित्रता का गीत गाने,

आ गया नव वर्ष फिर से।4।

--

ईस्वी सन की यही असली कहानी,

जश्न में नव वर्ष के डूबी जवानी,

आज आँसू विक्रमी सम्वत बहाता,

बन गया भिक्षुक सरीखा ज्ञान दाता,

फिर दिखावों को दिखाने,

आ गया नव वर्ष फिर से।5।

--

3 टिप्‍पणियां:

  1. सादर नमस्कार ,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (4-1-22) को "शिक्षा का सही अर्थ तो समझना होगा हमें"(चर्चा अंक 4299)पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है..आप की उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ायेगी .
    --
    कामिनी सिन्हा

    जवाब देंहटाएं
  2. वाह!सुंदर भावों से सजी बेहतरीन रचना । नववर्ष की हार्दिक मंगलकामनाएं ।

    जवाब देंहटाएं

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