"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

फ़ॉलोअर

बुधवार, 12 जनवरी 2022

गीत "गाओ फिर से नया तराना" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--
गुजर गया है साल पुराना।
गाओ फिर से नया तराना।।
--
सब कुछ तो पहले जैसा है,
लक्ष्य आज भी तो पैसा है,
सिर्फ कलेण्डर ही तो बदला,
वही ठौर है, वही ठिकाना।
--
नित्य नये अनुभव होते हैं,
कुछ हँसते हैं, कुछ रोते हैं,
जीवन तो बस एक सफर है,
सबको पड़ता आना-जाना।
--
पीना पड़ा यहाँ गरल है,
शंकर बनना नहीं सरल है,
कैसे महादेव बन जायें?
मुश्किल गंगा धार बहाना।
--
आपाधापी, भाग-दौड़ है,
गुणा-भाग है और जोड़ है,
इक आता है, इक जाता है,
जग है एक मुसाफिरखाना।
--
लोग मील के पत्थर जैसे,
अपनी मंजिल पायें कैसे?
औरों को पथ बतलाते हैं,
ये क्या जानें कदम बढ़ाना।
--

4 टिप्‍पणियां:

  1. सादर नमस्कार ,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बृहस्पतिवार (13-1-22) को "आह्वान.. युवा"(चर्चा अंक-4308)पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है..आप की उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ायेगी .
    --
    कामिनी सिन्हा

    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत ही सुन्दर और सार्थक सृजन आदरणीय लोहड़ी एवं मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं 💐💐

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत सुंदर सृजन प्रेरक सार्थक।
    लोहड़ी एवं मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं आदरणीय।
    सादर।

    जवाब देंहटाएं
  4. लोग मील के पत्थर जैसे,
    अपनी मंजिल पायें कैसे?
    औरों को पथ बतलाते हैं,
    ये क्या जानें कदम बढ़ाना।
    ....बहुत सुंदर

    जवाब देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails