शनिवार, 6 फ़रवरी 2021

दोहे "हरसिंगार के फूल" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

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करने में उपकार को, नहीं मानता हार।
बाँट रहा है गन्ध को, सबको हर सिंगार।।
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केसरिया टीका लगा, हँसता हरसिंगार।
अमल-धवल ये सुमन है, कुदरत का उपहार।।
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नतमस्तक होकर सदा, करता है मनुहार।
धरती पर बिखरा हुआ, लुटा रहा है प्यार।।
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वैद्यराज के रूप में, हरता सबके रोग।
वातव्याधि को दूर कर, करता बदन निरोग।।
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कलम बना कर डाल की, मिट्टी में दो गाड़।
नित्य नेह से सींचिए, उग जायेगा झाड़।।
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माटी कैसी भी रहे, नहीं इसे परहेज।
बिरुआ हरसिंगार का, रखना सदा सहेज।।
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कुछ वर्षों के बाद में, तन इसका गदराय।
पौधा हरसिंगार का, महावृक्ष बन जाय।।
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सबके मन को मोहते, सुन्दर-सुन्दर फूल।
पादप की नित-नियम से, सदा सींचना मूल।।
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शस्यश्यामला धरा पर, करना यह उपकार।
पेड़ लगाकर कीजिए, धरती का सिंगार।। 
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13 टिप्‍पणियां:

  1. माटी कैसी भी रहे, नहीं इसे परहेज।
    बिरुआ हरसिंगार का, रखना सदा सहेज।।

    हरसिंगार की खूबियों को बड़ी खूबसूरती से पिरोया है आपने अपने दोहों में आदरणीय !
    सादर नमन 🌹🙏🌹
    - डॉ शरद सिंह

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  2. शस्यश्यामला धरा पर, करना यह उपकार।
    पेड़ लगाकर कीजिए, धरती का सिंगार।।

    सुंदर संदेश देती रचना सादर नमन सर

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  3. सादर नमस्कार,
    आपकी प्रविष्टि् की चर्चा शुक्रवार ( 25-04-2021) को
    "धुआँ धुआँ सा आसमाँ क्यूँ है" (चर्चा अंक- 4047)
    पर होगी। चर्चा में आप सादर आमंत्रित हैं।
    धन्यवाद.


    "मीना भारद्वाज"

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    1. कृपया शुक्रवार के स्थान पर रविवार पढ़े । धन्यवाद.

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  4. बहुत सुंदर और सार्थक सृजन

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  5. सुंदर सन्देश देती रचना।

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  6. वैद्यराज के रूप में, हरता सबके रोग।
    वातव्याधि को दूर कर, करता बदन निरोग।।
    हरसिंगार की महत्ता बताते लाजवाब दोहे...
    वाह!!!

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  7. प्रणाम शास्त्री जी, हरस‍िंंगार को उगाने का सहज तरीका..इतने अद्भुत दोहे के माध्यम से..वाह

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  8. हरसिंगार की अनूठी विशेषताओं का सुंदर वर्णन !

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  9. बहुत सुंदर प्रस्तुति

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  10. सबके मन को मोहते, सुन्दर-सुन्दर फूल।
    पादप की नित-नियम से, सदा सींचना मूल।।
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    शस्यश्यामला धरा पर, करना यह उपकार।
    पेड़ लगाकर कीजिए, धरती का सिंगार।।

    वाह मनमोहक रचना! 🙏

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  11. हरसिंगार से धरती का श्रृंगार करते हुए बहुत सुंदर दोहे ।

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