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शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2021

दोहे "कामी आते पास" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

आलिंगन-दिवस (हग-डे)
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आलिंगन के दिवस में, करना मत व्यतिपात।
कामुकता को देखकर, बिगड़ जायेगी बात।।
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आलिंगन के दिवस पर, लिए अधूरी प्यास।
छोड़ स्वदेशी सभ्यता, कामी आते पास।
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अपनाओ निज सभ्यता, छोड़ विदेशी ढंग।
आलिंगन के साथ हो, जीवनभर का संग।।
--
पश्चिम के परिवेश की, ले करके हम आड़।
प्रणय दिवस के नाम पर, करते हैं खिलवाड़।।
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जो दिल में उपजे वही, होता सच्चा प्यार।
कामुकता के साथ में, मत देना उपहार।।
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चुम्बन-दिवस (किस-डे)
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एक दिवस के लिए क्यों, चुम्बन का व्यापार।
जीवनभर करते रहो, मीठा-मीठा प्यार।।
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मानव मानव ही रहें, यही हमारा मन्त्र।
वासनाओं के लिए क्यों, ढोंग और षड़यन्त्र।।
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चुम्बन-आलिंगन नहीं, होता सच्चा प्यार।
जो बिन माँगे ही मिले, वो चुम्बन उपहार।।
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जीवन के संग्राम को, समझ न लेना खेल।
जीवनसाथी से सदा, रखना हरदम मेल।।
--


10 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही सुन्दर संदेश पूर्ण रचना..समसामयिक भी..आपको मेरा प्रणाम..

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  2. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (१३-०२-२०२१) को 'वक्त के निशाँ' (चर्चा अंक- ३९७६) पर भी होगी।

    आप भी सादर आमंत्रित है।
    --
    अनीता सैनी

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत सुंदर संदेश..

    युवाओं को प्रेरणा देती रचना..

    जवाब देंहटाएं
  4. अपनाओ निज सभ्यता, छोड़ विदेशी ढंग
    आलिंगन के साथ हो, जीवनभर का संग।।

    मार्गदर्शन देता दोहा, साधुवाद !!!!

    जवाब देंहटाएं
  5. पश्चिम के परिवेश की, ले करके हम आड़।
    प्रणय दिवस के नाम पर, करते हैं खिलवाड़।।

    बहुत सही। प्रेरक।
    ऐसे ही दोहों की आज आवश्यकता है।
    सादर नमन आदरणीय ❗🙏❗
    - डॉ शरद सिंह

    जवाब देंहटाएं
  6. सचमुच प्रेरक सटीक! पारम्परिक टूटते मूल्यों पर सही दृष्टिपात।

    जवाब देंहटाएं
  7. प्रणाम शास्त्री जी, अद्भुत दोहों में कह दी सारी बात..क‍ि ..
    अपनाओ निज सभ्यता, छोड़ विदेशी ढंग।
    आलिंगन के साथ हो, जीवनभर का संग।। .. फ‍िर बहुरेंगे न‍िज सभ्यता के द‍िन

    जवाब देंहटाएं
  8. दोहरे नश्तर से की गई उचित शल्यक्रिया

    जवाब देंहटाएं
  9. पश्चिम के परिवेश की, ले करके हम आड़।
    प्रणय दिवस के नाम पर, करते हैं खिलवाड़।।

    बिलकुल सही कहा आपने सर,
    सुंदर संदेश देती रचना,सादर नमन आपको

    जवाब देंहटाएं

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