"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

फ़ॉलोअर

सोमवार, 1 फ़रवरी 2021

कविता "शाखाओं पर लदे सुमन हैं" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

--
सेमल के इस महावृक्ष का
,
पतझड़ में गदराया तन है।
पत्ते सारे सिमट गये हैं,
शाखाओं पर लदे सुमन हैं।।
--
टेसू के पेड़ों पर भी तो,
लाल अँगारे दहक रहे हैं।
अद्भुत् छटा वनों में फैली,
कुसुम डाल पर चहक रहे हैं।।
--
देते हैं सन्देश हमें यह,
अब बसन्त आने वाला है।
धूप गुनगुनी बोल रही है,
अब जाड़ा जाने वाला है।।
--
बासन्ती परिधान पहनकर
सरसों पीली फूल रही है।
गेंहूँ के कोमल बिरुओं पर,
हरी बालियाँ झूल रहीं हैं।।
--
प्रेमदिवस आने वाला है,
मस्त नज़ारों में खो जाएँ।
मौसम आमन्त्रण देता है,
खुश होकर हम नाचें-गाएँ।।
--
जेठ और आषाढ़ माह में,
फूल बसन्ती जैसे खिलते।
लू के गरम थपेड़े खा कर,
अमलतास के झूमर हिलते
,

--

11 टिप्‍पणियां:

  1. आशाओं और अभिलाषाओं से सुसज्जित सुन्दर पुष्पगुच्छ जैसी मनोहर कविता..

    जवाब देंहटाएं
  2. प्रकृति का बहुत सुंदर वर्णन

    जवाब देंहटाएं
  3. देते हैं सन्देश हमें यह,
    अब बसन्त आने वाला है।
    धूप गुनगुनी बोल रही है,
    अब जाड़ा जाने वाला है।।

    बहुत प्यारा संदेश...
    साधुवाद आदरणीय 🙏
    सादर,
    डॉ. वर्षा सिंह

    जवाब देंहटाएं
  4. वसंत की बहार देखते ही बनती है

    बहुत सुन्दर प्रकृति चित्रण

    जवाब देंहटाएं
  5. जेठ और आषाढ़ माह में,
    फूल बसन्ती जैसे खिलते।
    लू के गरम थपेड़े खा कर,
    अमलतास के झूमर हिलते,

    सुन्दर रचना....

    जवाब देंहटाएं
  6. इस टिप्पणी को लेखक ने हटा दिया है.

    जवाब देंहटाएं
  7. सादर नमस्कार ,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (2-2-21) को "शाखाओं पर लदे सुमन हैं" (चर्चा अंक 3965) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    --
    कामिनी सिन्हा


    जवाब देंहटाएं
  8. टेसू के पेड़ों पर भी तो,
    लाल अँगारे दहक रहे हैं।
    अद्भुत् छटा वनों में फैली,
    कुसुम डाल पर चहक रहे हैं।।


    वाह!!!
    अत्यंत सुंदर ऋतु वर्णन आदरणीय 🌹🙏🌹
    - डॉ शरद सिंह

    जवाब देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails