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सोमवार, 8 फ़रवरी 2021

दोहे "मिला कनिष्ठा अंगुली, होते हैं प्रस्ताव" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

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पश्चिम के अनुकरण का
बढ़ने लगा रिवाज। 
प्रेमदिवस सप्ताह कादिवस दूसरा आज।
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कल गुलाब का दिवस थाआज दिवस प्रस्ताव।
लेकिन सच्चे प्रेम का, सचमुच दिखा अभाव।।
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राजनीति जैसा हुआआज प्रणय का खेल।
झूठे हैं प्रस्ताव सबझूठा मन का मेल।।
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मिला कनिष्ठा अंगुली, होते हैं प्रस्ताव।
खींचातानी में भला, कैसे हो समभाव।।
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किया जिसे गत वर्ष थादिल से अंगीकार।
उससे क्यों इस साल मेंनहीं रहा अब प्यार।।
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पश्चिम का किरदार लेबदल गये हैं लोग।
भोगवाद में लिप्त होछोड़ दिया है योग।।
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जीवनभर की प्रीत कासिमट रहा आधार।
रासरंग के लिए हीउमड़ रहा अब प्यार।।
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ऋतुओं का राजा हमेंदेता है सन्देश।
दिल से सच्चे मिलन काउपजाओ परिवेश।।
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छोड़ो ढोंग-ढकोसलेतजो पश्चिमी रीत।
अमर हमेशा जो रहेवो होती है प्रीत।।
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4 टिप्‍पणियां:

  1. सादर नमस्कार ,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (9-2-21) को "मिला कनिष्ठा अंगुली, होते हैं प्रस्ताव"(चर्चा अंक- 3972) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    --
    कामिनी सिन्हा

    जवाब देंहटाएं
  2. वन्दन
    ऋतुओं का राजा हमें, देता है सन्देश।
    दिल से सच्चे मिलन का, उपजाओ परिवेश

    –सार्थक सामयिक सुन्दर लेखन

    जवाब देंहटाएं

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