"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

फ़ॉलोअर

सोमवार, 7 सितंबर 2009

‘‘कर्जा जो चुकाना है’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)


उधार की जिन्दगी
लौट आई है
फिर से पटरी पर
बहुत दिनों से
सूद नही दिया था
इसीलिए तो
साहूकार ब्याज वसूलने आया था
आखिर तीन दिनों में
सूद चुकता कर ही दिया
अभी तो
असल चुकाना बाकी है
तब तक तो....
अपने को
बन्धक रखना ही होगा
लेकिन इस बार
साहूकार
मेरे द्वार पर नही आयेगा
बल्कि
मुझे ही
उसके दर पर जाना होगा
कर्जा जो चुकाना है!

22 टिप्‍पणियां:

  1. फ़र्ज़ और क़र्ज़ का की बेहतरीन व्याख्या..
    सुंदर भाव...बधाई..

    जवाब देंहटाएं
  2. वाह शास्त्रीजी क्या खूब लिखा है आपने! कर्जा जो चुकाना है..बिल्कुल सही है आपने बखूबी क़र्ज़ और फ़र्ज़ दोनों को व्याख्या किया है! आपकी रचनाएँ तो मुझे हमेशा पसंद है खासकर आज का तो उम्दा रचना है!

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत बेहतरीन रचना. शुभकामनाएं.

    रामराम.

    जवाब देंहटाएं
  4. उधार की जिन्दगी
    लौट आई है
    फिर से पटरी पर
    बहुत दिनों से
    सूद नही दिया था
    " बेहद सुन्दर अभिव्यक्ति.."

    regards

    जवाब देंहटाएं
  5. जीवन में ऐसे अनेक मोड़ आते हैं...
    जहां सच और यथार्थ से मुंह नहीं मोड़ा जा सकता ।
    दुखती रग है ये ।
    आभार ।

    जवाब देंहटाएं
  6. शास्त्री जी, आप जैसे उत्तम विद्वान् निर्वाद लेखक एवं कवि की अभी न सिर्फ खटीमा को अपितु पूरे भारतवर्ष को बहुत शक्त जरुरत है, अतः साहूकार को भी असल वसूलने आने से पहले दस बार सोचना पडेगा ! हम आपके स्वस्थ और लम्बे जीवन की भगवान से प्रार्थना करते है !

    जवाब देंहटाएं
  7. जब आपका गद्य पढती हूं तो सोचते हूं कि आप अच्छे गद्य-लेखक हैं जब कविता पढती हूं तो सोचती हूं आप अच्छे कवि हैं. मतलब? आप दोनों ही विधाओं में पारंगत हैं. सुन्दर रचना.

    जवाब देंहटाएं
  8. क्या खूब लिखा है …………ज़िन्दगी और मौत की सच्चाइयो से रुबरु करा दिया …………अभी ऐसी बाते न कीजिये……………इस जहान को आप की बहुत जरूरत है।
    वैसे ज़िन्दगी का कर्ज़ और मौत का फ़र्ज़ काम दोनो ही मुश्किल है।
    आज तो बहुत ही उम्दा लिखा है ।

    जवाब देंहटाएं
  9. KARZ ...... BHOOLNA BHI CHAAHO TO BHOOL NAHI SAKTE ....... SUNDAR RACHNA HAI SHASHTRI JI ........ PRANAAM HAI AAPKO

    जवाब देंहटाएं
  10. 'लेकिन इस बार
    साहूकार
    मेरे द्वार पर नही आयेगा
    बल्कि
    मुझे ही उसके दर पर जाना होगा
    कर्जा जो चुकाना है!'
    -जीवन की क्षणभंगुरता को इतने सुन्दर तरीके से व्याख्यायित करने के लिए साधुवाद.

    जवाब देंहटाएं
  11. सही कहा आपने। कर्ज किसी भी चीज का हो, एक न एक दिन तो चुकाना ही पडता है।
    वैज्ञानिक दृ‍ष्टिकोण अपनाएं, राष्ट्र को उन्नति पथ पर ले जाएं।

    जवाब देंहटाएं
  12. शास्त्री जी,
    एक कणिका लिख रहा हूँ, बड़े काम की है :
    'जो हुआ सो हुआ समझो,
    सुख-दुःख सब दया-दुआ समझो,
    दांव हारा कि जीत ली बाज़ी,
    जिन्दगी, ऐ मियाँ जुआ समझो !'
    ब्लॉगर मित्रों की टिपण्णी से जाना कि आप अस्वस्थ हैं ! चिंता न कीजिये, कर्ज और फर्ज तो एक दिन चुक ही जाएगा-- आप चाहें न चाहें ! तो फिक्र किस बात की ?
    शीघ्र स्वस्थ होने की कामना सहित ... आ.

    जवाब देंहटाएं
  13. शास्त्रीजी बहुत ही सुंदर लगी आज की रचना, सच मै हमे कर्जा चुकाने तो उस के दुवारे ही जाना है, इस लिये कम से कम कर्ज ले.......

    जवाब देंहटाएं
  14. साहूकार
    मेरे द्वार पर नही आयेगा
    बल्कि
    मुझे ही
    उसके दर पर जाना होगा
    कर्जा जो चुकाना है!

    waaqai mein aisa nahi hota hai..////// saahukaar ab nahi aayega....

    bahut hi oomda rachna.......

    जवाब देंहटाएं
  15. बहुत बेहतरीन रचना,......सच्चाइयो से रुबरु करा दिया आपने। लाजवाब

    जवाब देंहटाएं
  16. आप स्वस्थ व प्रसन्न रहें यही कामना है।

    जवाब देंहटाएं
  17. वर्तमान की EMI की जीवन शैली वालों के लिए सार्थक चेतावनी..अच्छी रचना

    जवाब देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails