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मंगलवार, 8 सितंबर 2009

"हमें गुजरे हुए मंजर सुहाने याद आते हैं" (डॉ.रूपचंद्र शास्त्री मयंक)


आज पुरानी डायरी से एक गज़ल पेश कर रहा हूँ।
इसे साफ-साफ पढ़ने के लिए,
कृपया निम्न इमेज पर क्लिक कर दें !!

20 टिप्‍पणियां:

  1. क्या बात है आज तो पुराने दिन याद आ गये…………॥उस वक़्त बहुत अच्छा लिखते थे आप

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  2. बहुत ख़ूबसूरत ग़ज़ल पेश किया है आपने और उतनी ही सुन्दरता से सजाया है! बहुत खूब!

    जवाब देंहटाएं
  3. गवाही दे रहे है ये पुराने पेड़ बागो के
    तुम्हे मिलने के वो सारे बहाने याद आते है !

    वाह ! क्या कहू, एक-एक शब्द खुद व् खुद बहुत कुछ कह रहा है !

    जवाब देंहटाएं
  4. एक बात और कहना चाहूँगा शास्त्री जी कि दिल को कितना अच्छा लगता है जब कोई अपनी पुरानी रचना हाथ लग जाए ! मुझे भी अस्सी के दशक की अपनी लिखी एक डायरी कुछ समय पहले हाथ लगी थी ! और जब मैं उसे पढने बैठा तो भाव-विभोर हो गया था ! आजकल जो कुछ लिख रहा हूँ, उसे बुढापे के लिए संजो कर रख रहा हूँ ! आँखों ने साथ दिया तो आँगन में चारपाई लगा बैठ कर खुद पढूगा नहीं तो बीबी से बोलूंगा तूम पढ़ कर सूना दो .... अह हा-हा-हा !

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  5. वाह बहुत सुहानी ग़ज़ल है
    ---
    BlueBird

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  6. बधाई हॊ जी शाष्त्रीजी,

    रामराम.

    जवाब देंहटाएं
  7. दिल को छू गये..क्या जज़्बात पिरोया आपने..
    बेहतरीन ग़ज़ल....

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  8. बहुत खूब बात दिल को छू गयी है

    सुंदर रचना

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  9. "हमें गुजरे हुए मंजर सुहाने याद आते हैं"


    बहुत खूब, शास्त्री जी |
    बधाई हॊ|

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  10. बहुत खूबसूरत गज़ल -- नज़ाकत भी है और नफासत से सजी हुई.
    बहुत खूब

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  11. क्या सजी-धजी नवेली सी गज़ल है.बहुत खूब.

    जवाब देंहटाएं
  12. बहुत ख़ूबसूरत ग़ज़ल पेश किया है आपने और उतनी ही सुन्दरता से सजाया है.........

    जवाब देंहटाएं
  13. शास्त्री जी प ने तो सच मै हमें गुजरे हुए मंजर सुहाने याद दिला दिये, बहुत ही हसीन गजल
    धन्यवाद

    जवाब देंहटाएं
  14. क्या बात है,ओल्ड इज़ गोल्ड्।पुरानी शराब और पुराना चावल तो सुना था मगर ये पुराना शायर…………॥शानदार।

    जवाब देंहटाएं
  15. बेहद खूबसूरत रचना
    मन विभोर हो उठा पढ़ कर.....
    कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन.....

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  16. बहुत आंसू बहाये थे, बडे सपने सजाये थे
    हमे जिन्दादिली के वो ज़माने याद आते हैं.

    शास्त्री जी बडी प्यारी अभिव्यक्ति है....साधू

    जवाब देंहटाएं
  17. puraani yaadon ko bahut hi khoobsoorti se shabdon ki maala mein piroya hai aapne.........

    जवाब देंहटाएं

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