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सोमवार, 28 सितंबर 2009

‘‘कोई बात बने’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)



मित्र का साथ निभाओ तो कोई बात बने।
राम सा खुद को बनाओ तो कोई बात बने।।

एक दिन मौज मनाने से क्या भला होगा?
रोज दीवाली मनाओ तो कोई बात बने।
राम सा खुद को बनाओ तो कोई बात बने।।

इन बनावट के उसूलों में धरा ही क्या है?
प्रीत हर दिल में जगाओ तो कोई बात बने।
राम सा खुद को बनाओ तो कोई बात बने।।

क्यों खुदा कैद किया दैर-ओ-हरम में नादां,
रब को सीने में सजाओ तो कोई बात बने।
राम सा खुद को बनाओ तो कोई बात बने।।


सिर्फ पुतलों के जलाने से फयदा क्या है?
दिल के रावण को जलाओ तो कोई बात बने।
राम सा खुद को बनाओ तो कोई बात बने।।

13 टिप्‍पणियां:

  1. विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाएँ!

    जवाब देंहटाएं
  2. "सिर्फ पुतलों के जलाने से फयदा क्या है?
    दिल के रावण को जलाओ तो कोई बात बने।"

    विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाएँ!

    जवाब देंहटाएं
  3. सुंदर कविता!
    विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाएँ!

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत सुंदर कविता, सिर्फ़ पुतले जलाने.... बहुत अच्छे जी.
    आप को ओर आप के परिवार को विजयदशमी की शुभकामनाएँ!

    जवाब देंहटाएं
  5. प्रेरक संदेश देती सुन्दर रचना । आभार ।

    जवाब देंहटाएं
  6. 'सिर्फ पुतलों के जलाने से फयदा क्या है?
    दिल के रावण को जलाओ तो कोई बात बने।'
    - साधुवाद.

    जवाब देंहटाएं
  7. विजयादशमी की बहुत-बहुत शुभकामनायें.

    जवाब देंहटाएं
  8. सच कहा दिल का रावण जलाना होगा ......... इस देश को स्वर्ग बनाना होगा ...... लाजवाब लिख है ....आपको विजयदशमी की बहुत बहुत शुभकामनाएं ..........

    जवाब देंहटाएं
  9. यह अहसास रंग लाये तो कोई बात बने ।
    आभार ।

    जवाब देंहटाएं
  10. सिर्फ पुतलों के जलाने से फयदा क्या है?
    दिल के रावण को जलाओ तो कोई बात बने।
    राम सा खुद को बनाओ तो कोई बात बने।।

    behtreen bhav............sach kaha.kash aisa ho paye.

    जवाब देंहटाएं
  11. विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाएँ!

    जवाब देंहटाएं
  12. सिर्फ है पुतलों के जलाने से फयदा क्या?
    दिल के रावण को जलाओ तो कोई बात बने। SUNDAR SANDESH... SUBHKAMNAYEN...

    जवाब देंहटाएं

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