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सोमवार, 21 सितंबर 2009

‘‘नाग का हम फन कुचलना जानते हैं’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)



ईद, होली के दिनों में, प्यार के दस्तूर को पहचानते हैं।

हम तो वो शै हैं जो पत्थर को मनाना जानते हैं।


वायदों और वचन के पाबन्द हम,

फूल में हैं गन्ध के मानिन्द हम,

दोस्ती को हम निभाना जानते हैं।


हमने अंधियारे घरों को जगमगाया,

रोशनी के वास्ते दीपक जलाया,

प्रीत का दरिया बहाना जानते हैं।


हम बिना दस्तक दिये, जाते नही हैं,

किन्तु वे हरकत से बाज आते नही हैं,

नाग का हम फन कुचलना जानते हैं।


23 टिप्‍पणियां:

  1. ईद एवं नवरात्रे की शभकामनाएँ.

    रचना बढ़िया है.

    जवाब देंहटाएं
  2. वाह वाह क्या बात है! बहुत सुंदर रचना! नवरात्री की हार्दिक शुभकामनायें!

    जवाब देंहटाएं
  3. हम बिना दस्तक दिये, जाते नही हैं,

    किन्तु वे हरकत से बाज आते नही हैं,

    नाग का हम फन कुचलना जानते हैं।


    बहुत खूब कहा आपने

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत सुंदर! शुभकामनायें!

    जवाब देंहटाएं
  5. आप अच्छा लिखना और हम टिप्पणी देना भी जानते हैं। जनाब बहुत खूब लिखा है आपने

    जवाब देंहटाएं
  6. बहुत खूब, एकदम मेरे दिल की बात कह दी आपने आज तो !
    बहुत बहुत आभार |
    ईद एवं नवरात्रे की शभकामनाएँ |

    जवाब देंहटाएं
  7. नवरात्र ईद पर्व की शुभकामनाये . बहुत सुन्दर रचना पढ़कर आत्मा खुश हो गई शुक्रिया सर

    जवाब देंहटाएं
  8. बहुत सुंदर........अभिनव रचना..........

    अभिनन्दन !

    जवाब देंहटाएं
  9. प्रीत का दरिया बहाना जानते हैं।
    बहुत खूब प्रेम की दरिया बहाना तो हमारी परम्परा है.

    जवाब देंहटाएं
  10. काश हमारे सत्तासीन आपकी कविता के भाव आत्मसात कर लेते !

    जवाब देंहटाएं
  11. नवरात्रों की ओर ईद की शुभकामनाएँ!

    जवाब देंहटाएं
  12. शास्त्री जी,
    मज़ा आ गया ! 'हम बिना दस्तक दिए जाते nahi हैं...' बहुत अच्छी बन पड़ी है बात ! बधाई तो स्वीकार करें ! सादर... आ.

    जवाब देंहटाएं
  13. हमने अंधियारे घरों को जगमगाया,
    रोशनी के वास्ते दीपक जलाया,
    प्रीत का दरिया बहाना जानते हैं।


    राष्ट्र के संस्कारों को उजागर करती हुई रचना ...शास्त्री जी अच्छी लगी ये रचना

    जवाब देंहटाएं
  14. शास्त्री जी नमस्कार !
    ईद और नवरात्री की शुभकामनाये आपको
    अच्छी रचना

    जवाब देंहटाएं
  15. हम बिना दस्तक दिये, जाते नही हैं,
    किन्तु वे हरकत से बाज आते नही हैं,
    नाग का हम फन कुचलना जानते हैं।

    बढ़िया रचना!!! शुभकामनायें!!!

    जवाब देंहटाएं
  16. behtreen rachna likhi hai........bahut hi bhavmay kavita hai..........badhayi

    जवाब देंहटाएं
  17. हम बिना दस्तक दिये, जाते नही हैं,

    किन्तु वे हरकत से बाज आते नही हैं,

    नाग का हम फन कुचलना जानते हैं
    वाह क्या बात है बहुत सुन्दर। नवरात्र पर्व की शुभकामनायें।

    जवाब देंहटाएं
  18. हम बिना दस्तक दिये, जाते नही हैं,
    किन्तु वे हरकत से बाज आते नही हैं,
    नाग का हम फन कुचलना जानते हैं.......

    lajawaab likha hai ....Shashtri ji .... navraatri ki shubhkaamnaayen .....

    जवाब देंहटाएं
  19. हम बिना दस्तक दिये, जाते नही हैं, किन्तु वे हरकत से बाज आते नही हैं, नाग का हम फन कुचलना जानते हैं।

    bahut sahi kaha aapne....

    जवाब देंहटाएं

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