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बुधवार, 16 सितंबर 2009

‘‘चौदह दिन भी बीते’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)


आया मास सितम्बर तेरह-चौदह दिन भी बीते।
हिन्दी-हिन्दी रटा, मगर गागर अब तक हैं रीते।।

शरमा गये श्राद्ध भी, हमने इतनी श्रद्धा दिखलाई।
साठ वर्ष से राज-काज में हिन्दी नही समाई।।

रूस, चीन, जापान सबल हैं, अपनी ही भाषा से।
देख रही है हिन्दी, अपनों को कितनी आशा से।।

कब आयेगा सुप्रभात, कब सूरज नया उगेगा?
राष्ट्रसंघ में कब अपनी भाषा का भाग जगेगा?

भ्रष्ट राजनेताओं की, अब नष्ट सियासत करनी है।
सब भाषाओं के ऊपर अपनी भाषा अब धरनी है।।

14 टिप्‍पणियां:

  1. रूस, चीन, जापान सबल हैं, अपनी ही भाषा से।
    देख रही है हिन्दी, अपनों को कितनी आशा से।।

    कब आयेगा सुप्रभात, कब सूरज नया उगेगा?
    राष्ट्रसंघ में कब अपनी भाषा का भाग जगेगा?


    bahut acchaa likha ha aapne !!

    जवाब देंहटाएं
  2. bahut badhiya likha hai aur likh rahe hain............aapko jo samman mila hai uske liye hardik badhaiyan sweekarein.

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर, शाश्त्रीजी ! पता नहीं कब आयेगा, आयेगा भी या नहीं वह दिन !

    जवाब देंहटाएं
  4. रूस, चीन, जापान सबल हैं, अपनी ही भाषा से।
    देख रही है हिन्दी, अपनों को कितनी आशा से।।

    कब आयेगा सुप्रभात, कब सूरज नया उगेगा?
    राष्ट्रसंघ में कब अपनी भाषा का भाग जगेगा?


    bahut sashakt rachna, pata nahin netaon ki aankhen kab khulengi. umda rachna ke liye badhai.

    जवाब देंहटाएं
  5. बहुत सटीक रचना! शुभकामनाएं.

    रामराम.

    जवाब देंहटाएं
  6. बहुत सुन्दर इन चौदह दिनों(हिंदी पखवाडे) के परिपेक्ष्य में आपने बहुत कुछ अपने शब्दों में बयां कर दिया है .

    जवाब देंहटाएं
  7. रूस, चीन, जापान सबल हैं, अपनी ही भाषा से।....
    बहुत खुब उदारण दिया आप ने, एक बहुत सुंदर कविता.
    धन्यवाद

    जवाब देंहटाएं
  8. कब आयेगा सुप्रभात, कब सूरज नया उगेगा?
    राष्ट्रसंघ में कब अपनी भाषा का भाग जगेगा?
    आपही पूछने लगे कहीं मैने पढा था अपने कहा था कि वो समय जरूर जल्दी आयेगा जब हिन्दी का बोलबाला होगा रचना बहुत सुन्दर है आभार्

    जवाब देंहटाएं
  9. बहुत खुब, आपने छोटी सी रचना के माध्यम से बहुत बड़ी सच्चाई को दर्शा दिया,। बधाई

    जवाब देंहटाएं
  10. हिंदी के दर्द को अपने शब्द देने के लिए आपका बहुत बहुत आभार |
    बेहद सटीक रचना |

    जवाब देंहटाएं
  11. सब भाषाओं के ऊपर अपनी भाषा अब धरनी है।।
    ऐसा ही हो ...शुभकामनायें ..!!

    जवाब देंहटाएं
  12. हमारी भी है शुभकामना,
    साथ ही विश्वास भी,
    हैं साथ हम भी।
    जरूर होगा।

    जवाब देंहटाएं
  13. आपकी हर एक रचनाओं के मध्यम से बहुत कुछ सिखने को मिलता है! इतना सुंदर रचना लिखा है आपने कि मैं शब्दहीन हूँ!

    जवाब देंहटाएं
  14. भ्रष्ट राजनेताओं की, अब नष्ट सियासत करनी है।
    सब भाषाओं के ऊपर अपनी भाषा अब धरनी है।।

    jee haan

    ab to apni bhaasha hi dharni hai.....

    जवाब देंहटाएं

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