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गुरुवार, 17 सितंबर 2009

‘‘धरती का श्रंगार’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)


धरा सुसज्जित होती जिनसे, वो ही वृक्ष कहाते हैं,

जो गौरव और मान बढ़ाते, वो ही दक्ष कहाते हैं।


हरित क्रान्ति के संवाहक, ये जन,गण के रखवाले,

प्राण प्रवाहित करने वाली, मन्द समीर बहाते हैं।


पत्ते, फूल, मूल, फल इसके, जीवन देने वाले हैं,

देते हैं ये अन्न और अमृत सा, जल बरसाते हैं।


उपवन, आँगन, खेत, बाग में हमको पेड़ लगाने हैं,

इनकी शीतल छाया में ही जीव-जन्तु सुख पाते हैं।


धरती का श्रंगार अमर है पेड़ों की हरियाली से,

कदम-कदम पर ये जीवन में काम हमारे आते हैं।


20 टिप्‍पणियां:

  1. waah waah.......vrikshon ki hamare jeevan mein kya upyogita hai use poorna roop se darshati rachna hai.......sach kaha dharti ka shringaar hi to hain vriksh.

    जवाब देंहटाएं
  2. खेत, बाग में हमको पेड़ लगाने हैं, इनकी शीतल छाया में ही जीव-जन्तु सुख पाते हैं।
    धरती का श्रृंगार अमर है पेड़ों की हरियाली से, कदम-कदम पर ये जीवन में काम हमारे आते हैं।

    सही कह रहे है शात्री जे आप हमें सचेत होना पडेगा !!
    बढिया रचना

    जवाब देंहटाएं
  3. ekdam saty ped hi se sansar bacha hua hai inke bina jiwan ki kalpna bhi nahi ki ja sakti kintu kaun samjhaye logon ko .......

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत सुंदर रचना लिखा है आपने और सही कहा है आपने कि धरती का श्रृंगार वृक्ष है! पर आजकल देखा जाए तो सारे वृक्ष काटकर चारों ओर कांक्रीट का जंगल बनाया जा रहा है!

    जवाब देंहटाएं
  5. purano me bhi vriksh ko putr ki sangya di gayi hai..

    bahut badhiya rachana aapki..
    sundar bhav liye hue ...badhayi..

    जवाब देंहटाएं
  6. एक और सुन्दर कविता शास्त्री जी, काश ये हमारे शिक्षा के ठेकेदार इसे बच्चो के पाठ्यकर्म में शामिल कर पाते !

    जवाब देंहटाएं
  7. धरती का श्रृंगार , बहुत सुंदर शव्दो मै आप ने हम सब को इस का महत्व समझाया है अपनी कविता के रुप मै.
    धन्यवाद

    जवाब देंहटाएं
  8. काश जन जन में इसी भावना का समावेश हो जाये और हर तरफ हरियाली ही हरियाली हो |
    बेहद सुंदर और सटीक रचना |

    जवाब देंहटाएं
  9. बहुत खुब । इस जागरुकता से परिपुर्ण रचना के लिए बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  10. धरती का श्रृंगार अमर है पेड़ों की हरियाली से, कदम-कदम पर ये जीवन में काम हमारे आते हैं।

    bilkul sahi..........

    ped hi hamein jeevan dete hain......

    जवाब देंहटाएं
  11. अमूल्य गहना हैं ये
    इनके बारे में क्या कहना ।
    जो भी होगा
    कम ही होगा
    आभार ।

    जवाब देंहटाएं
  12. सरल पर सुदर संदेश देने में समर्थ रचना .. बहुत बढिया लिखा है !!

    जवाब देंहटाएं
  13. उपवन,आँगन, खेत,बाग में हमको पेड़ लगाने हैं,
    इनकी शीतल छाया में ही जीव-जन्तु सुख पाते हैं।

    धरती का श्रंगार अमर है पेड़ों की हरियाली से,
    कदम-कदम पर ये जीवन में काम हमारे आते हैं।

    भाई,
    रचना बहुत ही सुन्दर लगी.आपके प्रकृति प्रेम को प्रणाम. बधाई!!!

    जवाब देंहटाएं
  14. धरा सुसज्जित होती जिनसे, वो ही वृक्ष कहाते हैं, जो गौरव और मान बढ़ाते, वो ही दक्ष कहाते हैं।

    bahut sunder sarthak kavita.
    Badhai

    जवाब देंहटाएं
  15. प्रेम नारायण शर्मा जी।
    हिन्दी में टिप्पणी देने के लिए शुभकामनाएँ!
    http://uchcharan.blogspot.com/

    जवाब देंहटाएं
  16. बहुत ही सुन्‍दर भावों को सजोये हुये बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

    जवाब देंहटाएं
  17. वाह शास्त्री जी चित्त प्रसन्न हो उठा चैत्र की गरमी से राहत भी मिला

    जवाब देंहटाएं

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