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शुक्रवार, 18 सितंबर 2009

‘‘जीवन’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)



जीवन !
दो चक्र
कभी सरल
कभी वक्र,


जीवन !
दो रूप
कभी छाँव
कभी धूप


जीवन!
दो रुख
कभी सुख
कभी दुःख


जीवन !
दो खेल
कभी जुदाई
कभी मेल


जीवन !
दो ढंग
कभी दोस्ती
कभी जंग


जीवन !
दो आस
कभी तम
कभी प्रकाश


जीवन !
दो सार
कभी नफरत
कभी प्यार

20 टिप्‍पणियां:

  1. वाह बहुत सुंदर, सरल भाषा में आपने जीवन को सादगी से प्रस्तुत किया है! हर एक लाइन में सच्चाई है !

    जवाब देंहटाएं
  2. Jiwan Do Saar,
    Nafrat aur pyar.

    Bahut behtar tarike sedardhaya aapne jiwan ki kahani..

    badhayi ..

    जवाब देंहटाएं
  3. जीवन !
    दो आस
    कभी तम
    कभी प्रकाश
    waah bahut sunder,eevan ka har pehlu dardhati sunder kavita.

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत खुब। बड़े आसानी से आपने जिवन के सार को बतला दिया।

    जवाब देंहटाएं
  5. विनोद कुमार पांडेय जी।
    धन्यवाद।
    यह पंक्तियाँ भी जोड़ दी हैं।

    जवाब देंहटाएं
  6. अरे वाह .. इसे इतना सुंदर ढंग से रच दिया !!

    जवाब देंहटाएं
  7. शास्त्री जी नमस्कार सुन्दर कविता और भाव अत्यंत प्रिय
    पंकज

    जवाब देंहटाएं
  8. कम शब्दों में अच्छी रचना आभार.

    जवाब देंहटाएं
  9. jeevan ka har rang darshti rachna.............sach jeevan aisa hi hai............behad khoobsoorti se jeevan ka saar bata diya.

    जवाब देंहटाएं
  10. वाह क्या बात कही आप ने सारा सार ही दे दिया जिन्दगी का.
    धन्यवाद

    जवाब देंहटाएं
  11. वाह, इसे कहते है हमारे यहाँ दाने ( वरिष्ठ व्यक्तित्व) की सीख और आंवले का स्वाद , बहुत ही बढिया शास्त्री जी, आजकल थोडा व्यस्त चल रहा हूँ इसलिए इस ओर आना करम्बध नहीं हो पा रहा है !

    जवाब देंहटाएं
  12. जीवन !
    दो रूप
    कभी छाँव
    कभी धूप
    जीवन के विविध रूप बहुत सरल शब्दो मे
    बहुत सुन्दर

    जवाब देंहटाएं
  13. मयंक जी आपने दो बातों मे ही पूरी जिन्दगी का सच बता दिया बहुत सुन्दर रचना है बधाई

    जवाब देंहटाएं
  14. बहुत सुन्दर……………………जीवन की बहुत सुन्दर परिभाषा कह दी आपने । आभार ।

    जवाब देंहटाएं
  15. आदरणीय डॉ. शास्त्री साहब,

    जीवन का सार दो बातों के संबंध से बहुत ही सरलता से कहा है।

    सादर प्रणाम,

    मुकेश कुमार तिवारी

    जवाब देंहटाएं
  16. जीवन !
    दो सार
    कभी नफरत
    कभी प्यार

    ek dum sahi kaha apne..................

    apki is rachna ko mera naman

    जवाब देंहटाएं

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