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रविवार, 20 सितंबर 2009

‘‘आदमी के डसे का नही मन्त्र है’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

बावफा के लिए तो नियम हैं बहुत,

बेवफाई का कोई नही तन्त्र है।

सर्प के दंश की तो दवा हैं बहुत ,

आदमी के डसे का नही मन्त्र है।।

गन्ध देना ही है पुष्प का व्याकरण,

दुग्ध देना ही है गाय का आचरण,

तोल और माप के तो हैं मीटर बहुत,

प्यार को नापने का नही यन्त्र है।

आदमी के डसे का नही मन्त्र है।।

ईद, होली, दिवाली के त्योहार में,

दम्भ की है मिलावट भरी प्यार में,

आ बसी हैं विदेशों की पागल पवन,

छल-कपट से भरा आज जनतन्त्र है।

आदमी के डसे का नही मन्त्र है।

नींव कमजोर पर हैं इमारत खड़ी,

शून्य से हो रहीं हैं इबारत बड़ी,

राम के राज में चोर-डाकू बहुत,

झूठ आजाद है, सत्य परतन्त्र है।

आदमी के डसे का नही मन्त्र है।।

19 टिप्‍पणियां:

  1. सर्प के दंश की तो दवा हैं बहुत ,
    आदमी के डसे का नही मन्त्र है।।
    वाह कितना कटु यथार्थ कह दिया आपने तो --
    और भी
    झूठ आजाद है, सत्य परतन्त्र है।
    आदमी के डसे का नही मन्त्र है।।

    जवाब देंहटाएं
  2. क्या बात है मयंक जी..........
    वाह वाह
    अत्यन्त सत्य वचन ....
    अभिनन्दन आपका !

    जवाब देंहटाएं
  3. आदमी के डसे का नही मन्त्र है
    नींव कमजोर पर हैं इमारत खड़ी,
    शून्य से हो रहीं हैं इबारत बड़ी,
    राम के राज में चोर-डाकू बहुत,
    झूठ आजाद है, सत्य परतन्त्र है।

    आपने बिल्कुल सही कहा है। बहुत ही उम्दा।

    जवाब देंहटाएं
  4. आपने बिल्कुल सही कहा है ।
    सत्य वचन...सत्य वचन |
    बहुत ही उम्दा ।

    जवाब देंहटाएं
  5. वाह-वाह क्या बात है, दिल को छु गयी आपकी ये रचना। बहुत-बहुत बधाई......

    जवाब देंहटाएं
  6. वह क्या बात है..सोलह आने सच्ची बात.,खूब कहा है.

    जवाब देंहटाएं
  7. आदमी के डसे का नही मन्त्र है।। आप ने विलकुल सच लिखा है कि आदमी के डसे का नही है...

    जवाब देंहटाएं
  8. बहुत सुन्दर , आज के समय की बात कह दी आपने । आभार ।

    जवाब देंहटाएं
  9. कटु यथार्थ कह दिया………………………बधायी

    जवाब देंहटाएं
  10. नींव कमजोर पर हैं इमारत खड़ी,
    शून्य से हो रहीं हैं इबारत बड़ी,
    राम के राज में चोर-डाकू बहुत,
    झूठ आजाद है, सत्य परतन्त्र है।
    आदमी के डसे का नही मन्त्र है।।

    वाह! वाह! क्या बात है!

    जवाब देंहटाएं
  11. आदमी के डसे का नही मन्त्र है।
    bilkul sahi kaha aapne,

    aadmi ke dase ka hota Mantra
    to sudhar jata saaraa ka kaara Tantra

    जवाब देंहटाएं
  12. आदमी के डसे का नही मन्त्र है।।

    -सत्य वचन!! बेहतरीन रचना.

    जवाब देंहटाएं
  13. "गन्ध देना ही है पुष्प का व्याकरण" क्या बात है।

    वाह बहुत अच्छी रचना है!

    जवाब देंहटाएं
  14. बहुत सुंदर रचना लिखा है आपने जो सच्चाई का प्रतीक है! हर एक पंक्तियाँ ज़िन्दगी की सच्चाई को बयान करती है ! दिल को छू गई आपकी ये शानदार रचना!

    जवाब देंहटाएं
  15. बिलेकुल सही कहा है आदमी के डसे का कोई मन्त्र ना दवा है बहुत सशक्त रचना है बधाई

    जवाब देंहटाएं
  16. सही बात है शास्त्री जी प्यार को मापने का कोई यंत्र नहीं है .आप एक एक बात को तोल के लिखते है !!

    जवाब देंहटाएं
  17. बावफा के लिए तो नियम हैं बहुत,
    बेवफाई का कोई नही तन्त्र है।

    क्या बात है शास्त्री जी....बेहद सटीक | साधू!साधू!!

    जवाब देंहटाएं
  18. बावफा के लिए तो नियम हैं बहुत,बेवफाई का कोई नही तन्त्र है। सर्प के दंश की तो दवा हैं बहुत , आदमी के डसे का नही मन्त्र है।।

    waaqai mein bewafaai ka koi tantra nahi hota.....

    जवाब देंहटाएं

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