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सोमवार, 14 सितंबर 2009

‘‘मन्त्रियों की जबानों में छाला हुआ’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

हिन्दी-दिवस की शुभकामनाएँ!!

राग आलापते जिन्दगी कट गई,

तेल कानों में हमने है डाला हुआ।

बीनने हमको टुकड़े हैं परदेश के,

इसलिए रोग इंग्लिश का पाला हुआ।

तेल कानों में हमने है डाला हुआ।।


हमने माता को माता न माना कभी,

देश से अपना नाता न जाना कभी,

सभ्यता को है पश्चिम में ढाला हुआ।

तेल कानों में हमने है डाला हुआ।।


आज हिन्दी का दिन शोक का है दिवस,

भोली-बोली का दिन रोग का है दिवस,

स्वामिनी को दिलों से निकाला हुआ।

तेल कानों में हमने है डाला हुआ।।


हिन्दी भाषा की रातें अमावस सी हैं,

आंग्ल-भाषा की रातें तो पावस सी हैं,

मन्त्रियों की जबानों में छाला हुआ।

तेल कानों में हमने है डाला हुआ।।

13 टिप्‍पणियां:

  1. इस बेहतरीन रचना के लिए बधाइयाँ! हर एक पंक्तियाँ सच्चाई बयान करती है ! बहुत बढ़िया लगा!

    जवाब देंहटाएं
  2. तेल कानों मे है हमने डाला हुआ.

    बहुत सटीक रचना . बधाई.

    रामराम.

    जवाब देंहटाएं
  3. हैलो, लेडीज़ एंड जैंटलमैन, टूडे हमको हिंडी डे मनाना मांगटा...

    अंग्रेज़ चले गए लेकिन अपनी....छोड़ गए...

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत खुब । हिन्दी की आज के दशा को जिस तरह से आप ने दर्शाया है, वह काबिले तारीफ है। हिन्दी दिवस के अवसर पर इस लाजवाब रचना के लिए बहुत-बहुत बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  5. तेल डालने के बाद बाहर से रुई भी ठूस रखी है ! बढिया कविता,. बधाई !

    जवाब देंहटाएं
  6. सच्चायी से रु-ब-रु करवा दिया…………………………बेह्तरीन ……………………………हर पन्क्ति सोचने को मजबूर करती है।

    जवाब देंहटाएं
  7. हिंदी दिवस की आप को बहुत बहुत शुभकामनाएं |
    एक बेहद मारक अस्त्र के प्रयोग के लिए बहुत बहुत आभार |
    शायद आप का यह वार उन निकम्मों को सुधार दे |

    जवाब देंहटाएं
  8. शास्त्री जी, सटीक बात कही है आपने, हिंदी दिवस पर एक सीख
    तेल कानों में है हमने डाला हुआ
    बहुत सही
    धन्यवाद

    जवाब देंहटाएं
  9. एक दम सटीक लिखा जी हम बहरे नही ,ढोंग कर रहे है, आप ने एक सच्चाई लिख दी.
    धन्यवाद

    जवाब देंहटाएं
  10. behtareen.......

    हमने माता को माता न माना कभी,

    देश से अपना नाता न जाना कभी,

    सभ्यता को है पश्चिम में ढाला हुआ।

    तेल कानों में हमने है डाला हुआ।

    in lines ne dil chhoo liya hai........

    जवाब देंहटाएं
  11. हिन्दी भाषा की रातें अमावस सी हैं,

    आंग्ल-भाषा की रातें तो पावस सी हैं,

    मन्त्रियों की जबानों में छाला हुआ।

    तेल कानों में हमने है डाला हुआ।।
    बहुत सुन्दर रचना है गहरी चोट है हिन्दी के दुश्मनों पर बधाई

    जवाब देंहटाएं
  12. बहुत सुन्दर कटाक्स तेल है कानो में डाला हुआ |

    जवाब देंहटाएं

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