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मंगलवार, 1 सितंबर 2009

‘‘बिन्दी के बिना, मेरा श्रंगार?’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)



जी हाँ,
मैं सागर हूँ,
बून्दें
मेरा अस्तित्व हैं,
जल
मेरा प्राण है,
किन्तु
यदि ये बून्दें ही
बगावत पर उतर आयें तो???
.............................................

जी हाँ,
मैं पहाड़ हूँ,
पत्थर मेरा अस्तित्व हैं,
किन्तु
यदि ये ही दरकने लगे तो???
.................................................

जी हाँ,
मैं हिन्दी हूँ,
भारत माता के माथे की
बिन्दी हूँ,
किन्तुबिन्दी के बिना,
मेरा श्रंगार ??? .......................................

21 टिप्‍पणियां:

  1. बिन बिन्दी श्रृंगार अधूरा
    बिन हिन्दी क्या भारत पूरा?

    जवाब देंहटाएं
  2. वाह वाह क्या बात है! आपकी हर एक रचना एक अलग सा रंग लाता है! सही में बिना बिंदी के श्रृंगार अधूरा रहता है!

    जवाब देंहटाएं
  3. इस से पहले कि बिन्दी की चिन्दी चिन्दी करके
    चन्द चिन्दी चोर लोग
    बाज़ार में
    बेच आयें
    __आपकी कविता प्रहरियों के लिए
    एक चेतावनी है
    _____________बधाई !

    जवाब देंहटाएं
  4. बेहद भावपूर्ण रचना .....बधाई

    जवाब देंहटाएं
  5. वाह शास्त्री जी क्या लिखा है आपने बेहतरिन। जैसे बिन बिन्दी श्रृंगार अधूरा है वैसे ही बिन हिन्दी हिन्दुस्तान अधुरा है।

    जवाब देंहटाएं
  6. सत्य बात कही आपने जो सारे हिन्दुस्तानी की आवाज़ है..हिन्दी बिना हिन्दुस्तान अधूरा...
    सुंदर भाव से परिपूर्ण सुंदर रचना.
    बहुत बहुत बधाई....

    जवाब देंहटाएं
  7. बहुत ही सुंदर रचना आपकी। बधाई स्वीकारें।

    जवाब देंहटाएं
  8. डाक्टर साब ,
    बहुत बढ़िया रचना है |
    हिन्दी सही माएने में भारत माता के माथे की बिंदी है और यह बिंदी कभी भी मिटनी नहीं चाहिए |

    जवाब देंहटाएं
  9. PRANAAM SHAASHTRI JI ......
    SACH LIKHA HAI BINDI KE BEENA SHRANGAAR ADHOORA HAI ...... LAJAWAAB LIKHA HAI AAPNE ....GAHRA SANDESH HAI AAPKI IS RAXCHNA MEIN ....

    जवाब देंहटाएं
  10. डाक्टर साब ,
    बहुत बढ़िया रचना है |

    जवाब देंहटाएं
  11. बहुत सुन्दर भारत की तस्वीर खीँची है हिन्दी के बिना भारत की शान ही अधूरी है बधाई इस भव्पूर्ण रचना के लिये

    जवाब देंहटाएं
  12. लाजवाब..........अद्भुत..........क्या खूब लिखा है
    सच हिंदी बिना हिंदुस्तान अधूरा है .
    दिल को गहराई तक छू गयी रचना

    जवाब देंहटाएं
  13. बहुत खुब लिखा, ओर मेरे मन की बात लिख दी आप ने धन्यवाद

    जवाब देंहटाएं
  14. वाह !! क्या बात कही आपने...बहुत ही सुन्दर रचना...

    मैं भी श्री श्यामल जी के शब्द दुहराना चाहूंगी...

    बिन बिन्दी श्रृंगार अधूरा
    बिन हिन्दी क्या भारत पूरा???????

    जवाब देंहटाएं
  15. हिन्दी के बिना भारत की शान ही अधूरी है

    बधाई एक सारगर्भित रचना के लिए

    जवाब देंहटाएं
  16. हिंदी को समर्पित, बहुत खूब

    जवाब देंहटाएं

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