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शुक्रवार, 26 जून 2020

बालकविता "रंग-बिरंगी तितली आई" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

तितली आई! तितली आई!!
रंग-बिरंगीतितली आई।।

कितने सुन्दर पंख तुम्हारे।
आँखों को लगते हैं प्यारे।।

फूलों पर खुश हो मँडलाती।
अपनी धुन में हो इठलाती।।

जब आती बरसात सुहानी।
पुरवा चलती है मस्तानी।।

तब तुम अपनी चाल दिखाती।
लहरा कर उड़ती बलखाती।।

पर जल्दी ही थक जाती हो।
दीवारों पर सुस्ताती हो।।

बच्चों के मन को भाती हो।
इसीलिए पकड़ी जाती हो।।

4 टिप्‍पणियां:

  1. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार(२६ -०६-२०२०) को 'उलझन किशोरावस्था की' (चर्चा अंक-३७४५) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है
    --
    अनीता सैनी

    जवाब देंहटाएं
  2. प्रकृति की सबसे नाजुक, सुन्दर व अजूबी रचना

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत ही शानदार बाल रचना
    वाह!!!

    जवाब देंहटाएं

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