"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

बुधवार, 13 मई 2009

"कुटिल-चक्र" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)


आज समय का, कुटिल - चक्र चल निकला है।

संस्कार का दुनिया भर में, दर्जा सबसे निचला है।।

नैतिकता के स्वर की लहरी मंद हो गयी।

इसीलिए नूतन पीढ़ी, स्वच्छन्द हो गयी।।

अपनी गल्ती को कोई स्वीकार नही करता है।

दोष स्वयं के, सदा दूसरों के माथे पर धरता है।।

सबके अपने नियम और सबका अन्दाज निराला है।

बिके हुए हर नेता के मुँह पर तो लटका ताला है।।

पत्रकार का मतलब था, निष्पक्ष और विद्वान-सुभट।

नये जमाने में इसकी, परिभाषाएँ सब गई पलट।।

नटवर लाल मीडिया पर, छा रहे बलात् बाहुबल से।

गाँव शहर का छँटा हुआ, अब जुड़ा हुआ है चैनल से।।

गन्दे नालों और नदियों की, बहती है अविरल धारा।

नहाने वाले पर निर्भर है, उसको क्या लगता प्यारा??

10 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सही चित्रण किया है.

    रामराम.

    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत सुन्दर शब्द चित्र

    जवाब देंहटाएं
  3. bahut khoob.........achcha vyang hai aaj ke halat paida karne walon par.

    जवाब देंहटाएं
  4. इस पोस्ट की प्रत्येक पंक्ति
    सच्चाई बखान कर रही है!

    पर इन विसंगतियों से बचने का
    मार्ग-दर्शन भी बहुत जरूरी है!
    सबको इस बारे में गहन चिंतन करना चाहिए!

    मयंक जी की ऐसी रचनाएँ तो आती ही रहती हैं,
    जो नई पीढ़ी के साथ-साथ
    पुरानी पीढ़ी का भी मार्ग-दर्शन करती हैं!

    जवाब देंहटाएं
  5. Vakai aaj ki vidambana jhalakti hai in panktiyon mein.

    जवाब देंहटाएं
  6. आपका kahna सही है शास्त्री जी ..........आज का ज़माना ऐसा ही है...........आपका लिखा हर चाँद.सत्य बयान कर रहा है..आइना है समाज का आपकी रचना................लाजवाब

    जवाब देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails