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बुधवार, 20 मई 2009

"कम्प्यूटर" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)


यह मेरा कम्प्यूटर प्यारा,

इसमें ज्ञान भरा है सारा।


भइया इससे नेट चलाते,

नई-नई बातें बतलाते।


यह प्रश्नों का उत्तर देता,

पल भर में गणना कर लेता।





माउस, सी.पी.यू, मानीटर,


मिलकर बन जाता कम्प्यूटर।





इसमें ही की-बोर्ड लगाते,

जिससे भाषा को लिख पाते।

नया जमाना अब है आया,

हमने नया खजाना पाया।


बड़ा अनोखा है यह टीचर,

सभी सीख लो अब कम्प्यूटर।

14 टिप्‍पणियां:

  1. वाह बडी आसानी से आपने कम्पयूटर की जानकारी दे दी और हमने सीख भी लिया । थैंक यू

    seema sachdev

    जवाब देंहटाएं
  2. aur ham yeh kavita computer par hi paDh rahe haiN, waah computer...

    जवाब देंहटाएं
  3. bahut saral tareeke se aap bachon ko har cheez ke bare me samjhate hain bahut badiya abhar

    जवाब देंहटाएं
  4. इस कविता को पढ़कर
    स्पष्ट हो गया है कि
    अल्प समय में ही मयंक जी ने
    बातकविताओं की रचना पर
    अपनी बहुत अच्छी पकड़ बना ली है!

    जवाब देंहटाएं
  5. बड़ा काम का है कम्प्यूटर तो..हम तो लगा बस ब्लॉगिंग के काम आता है.

    जवाब देंहटाएं
  6. वाह आपने तो कंप्युटर जी के काम भी कविता मे बता दिये. बहुत बढिया रचना.

    रामराम.

    जवाब देंहटाएं
  7. इस पोस्ट के प्रस्तुतीकरण से
    जो श्रम और लगन झलक रही है,
    वह यह दर्शा रही है कि
    "मयंक जी" ब्लॉगिंग के माध्यम से
    "बालसाहित्य" के सागर को
    एक से बढ़कर एक अमूल्य रत्न
    समर्पित करते जा रहे हैं!

    जवाब देंहटाएं
  8. बच्चों को कंप्यूटर के
    हार्डवेयर्स की जानकारी
    रोचक ढंग से देने के लिए भी
    यह बालकविता उत्तम है!

    जवाब देंहटाएं
  9. सरल शब्दों में ज्ञान बढ़ता है आपका प्रयास

    कभी सोम-रस पे भी आयें और पढ़े

    ताजमहल के रहस्य के लिए http://somadri.blogspot.com/2009/05/taj-or-tejo.html

    माँ को समर्पित मेरा ब्लॉग सोम-रस के लिए http://som-ras.blogspot.com/2009/05/blog-post.html

    जवाब देंहटाएं
  10. computer ke bare mein is dhang se to sirf aap hi samjha sakte hain........itna saral aur sahaj tarika sirf aap hi jante hain.

    जवाब देंहटाएं
  11. शीर्ष टिप्पणीकार के,
    रवि जी हैं हकदार।
    धन्यवाद के शब्द में,
    छिपा हुआ है प्यार।।
    आधा शतक लगाय कर,
    आये ऊपर आप।
    उच्चारण पर आपकी,
    बड़ी अनोखी छाप।।

    जवाब देंहटाएं
  12. प्यार का उपहार पाकर,
    हो गया हूँ धन्य!
    आप-जैसा श्रेष्ठ सर्जन
    कर न पाए अन्य!

    जवाब देंहटाएं
  13. क्या करूँ, मयंक जी!
    आपकी रचनाएँ होती ही ऐसी हैं
    कि उनसे कुछ न कुछ
    व्यक्त करने की प्रेरणा
    स्वयं ही मिल जाती है!

    जवाब देंहटाएं

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