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गुरुवार, 9 अप्रैल 2009

"गप-शप" भैया! सब फैवीकोल का ही कमाल है। (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)


आज राजनीति के बाजार में भी कई तरह के नेतारूपी फैवीकोल छाये हुए हैं।

जिन्होंने असली को भी पीछे छोड़ दिया है।

परन्तु गुणवत्ता और क्रेज में पुराने नेतारूपी फैवीकोल का आज भी कोई सानी नही है।

अब जनता को ही अपना फैसला सुनाना हैं कि- वह असली को पसन्द करती है या नकली को।
असली को पसन्द किया तो पुराने चेहरे ही ज्यादा होंगे। यदि नकली को ज्यादा पसन्द किया तो नये चेहरों की महफिल सजी होगी।

बहरहाल नये और पुराने सभी में से एक से एक अच्छा और नायाब फैवीकोल राजनीति के बाजार में छाया हुआ है।

कुछ ने तो ऊँची-ऊँची कुर्सियों पर इसे लगाना भी शुरू कर दिया है। जिससे कि वो मजबूती के साथ मन-माफिक कुर्सी से चिपक जायें।

बेचारे चिदम्बरम ने तो इसके कारण जूते का स्वाद भी चख लिया है। उनके साथ जरनैल सिंह-जूतेवाला का नाम भी हमेशा के लिए अमर हो गया है।

एक पत्रकार ने एक जूता उछालने पर माल व माया दोनों कमा ली हैं।

मरता क्या न करता, करनी का फल तो भोगना ही पडता है। बेचारे चिदम्बरम ने भी फैवीकोल की महिमा को पहचान कर इसे माफ भी कर दिया है।

भैया! सब फैवीकोल का ही कमाल है।

6 टिप्‍पणियां:

  1. भाई आशीष कुमार ‘अंशु’ जी!
    मैंने ‘गप-शप’ लिखी है।
    इसमें सहमति और असहमति का
    कोई प्रश्न ही नही उठता है।
    वैसे भी ‘गप-शप’ से कौन सहमत होता है?
    भैया! सब फैवीकोल का ही कमाल है।

    जवाब देंहटाएं
  2. वाह शाश्त्री जी, बेहतरीन गपशप रही ये तो.

    रामराम.

    जवाब देंहटाएं
  3. हा हा हा :)
    गपशप अच्छी है
    आप से एक बात कहनी थी ...कृपया ये बेक्ग्रौंद से चमकीला नीला और ये लिखा हुआ रेड कलर हटा सके तो ज्यादा बेहतर होगा ...चूंकि ये ब्लू ए रेड कलर आँखों में चुभता है

    जवाब देंहटाएं
  4. भैया गप-शप हो या सच-मुच! कमाल तो फेविकाल का ही है इस काल में:)

    जवाब देंहटाएं

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