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गुरुवार, 30 अप्रैल 2009

"दंगल अब तैयार हो गया।" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

यह कविता मेरे नये ब्लॉग ‘‘शब्दों का दंगल’’ पर भी उपलब्ध है।

शब्दों के हथियार संभालो, सपना अब साकार हो गया।

ब्लागर मित्रों के लड़ने को, दंगल अब तैयार हो गया।।

करो वन्दना सरस्वती की, रवि ने उजियारा फैलाया,

नई-पुरानी रचना लाओ, रात गयी अब दिन है आया,

गद्य-पद्य लेखनकारी में शामिल यह परिवार हो गया।

ब्लॉगर मित्रों के लड़ने को, दंगल अब तैयार हो गया।।

देश-प्रान्त का भेद नही है, भाषा का तकरार नही है,

ज्ञानी-ज्ञान, विचार मंच है, दुराचार-व्यभिचार नही है,

स्वस्थ विचारों को रखने का, माध्यम ये दरबार हो गया।

ब्लॉगर मित्रों के लड़ने को, दंगल अब तैयार हो गया।।

सावधान हो कर के अपने, तरकश में से तर्क निकालो,

मस्तक की मिक्सी में मथकर, सुधा-सरीखा अर्क निकालो,

हार न मानो रार न ठानो, दंगल अब परिवार हो गया।

ब्लॉगर मित्रों के लड़ने को, दंगल अब तैयार हो गया।।

7 टिप्‍पणियां:

  1. मैं भी जिम्म ज्वाईन करने की सोच रहा हूं.. दंगल में अमंगल से बचने के लिये :)

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  2. shastri ji ,
    dangal mein kab mangal hota hai
    kya karna hai dnagal karke
    bhavon ka aadan pradan karte hain
    ladne ko kab adte hain
    kya karna hai dangal karke

    aapne bahut achchi post banayi hai.
    bahut pasand aayi.aajkal jo ho raha hai ya hua mere sath us par aapne jo likha sachmuch sarahniya hai.

    bahut hi badhiya.

    जवाब देंहटाएं
  3. shaastri ji ,
    aap to aise na the.aap apne aap ko sanbhalkar doosaron ko sanbhaaliye
    shayad aapas mein pyar bana rahe.apne mohalle mein bhi aisa hi karte hain aap .
    kisi ke ho jaao ya kisi ko apna bana lo .aisi seekh ki apeksha karte hai aap se.jay ram ji ki.

    जवाब देंहटाएं
  4. ब्लॉगर मित्रों के लड़ने को दंगल अब तैयार हो गया..

    जीत सच्चाई की ही हो.. आमीन..

    जवाब देंहटाएं
  5. भाइ शाश्त्री जी आपके ब्लाग पर हमारी टिपणियां दिनो दिन घटती क्यूं जारही हैं? अभी आपने दस दिन पहले ही ५० पूरी होने की बधाई दी थी आज दस दिन बाद घटते घटते ४७ रह गई ? कहीं कोई चोर वोर तो नही घुस गया?:)

    रामराम.

    जवाब देंहटाएं
  6. मस्तक की मिक्सी में मथकर, सुधा-सरीखा अर्क निकालो,
    हार न मानो रार न ठानो, दंगल अब परिवार हो गया।
    ब्लॉगर मित्रों के लड़ने को, दंगल अब तैयार हो गया।।
    bloggers ka dangal!!!
    waah!
    drishy-shrvy suvidha bhi uplabddh karaayeeyega.
    'स्वस्थ विचारों को रखने का, माध्यम ये दरबार हो गया।yah uddeshy raheyga to dangal mein mangal hoga..anytha......

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  7. जो भी हो,
    पर चेहरे पर मुखौटे नहीं लगे होने चाहिए!

    जवाब देंहटाएं

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