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मंगलवार, 7 अप्रैल 2009

"भारतीय नारी" ( रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")



उनकी और उनके बच्चों की बातें,


चुप होकर सह लेती है।


सब के दर्द,


अपने दिल में दबा कर,


रख लेती है,


हाँ,


वह एक माँ है,


और एक अच्छी,


पत्नी भी है।


वह भारतीय नार है,


उसे परिवार में,


सबसे प्यार है।


सास-ससुर को भी,


झेलती है,


उनके लिए,


पतली-पतली,


रोटियाँ भी बेलती है।


इसने घर में,


बेटी का दर्जा पा लिया है,


काश दुनियाँ भर की,


सभी नारियाँ,


ऐसी ही होती।


जन्नत,


घर-घर में होती।


11 टिप्‍पणियां:

  1. "इसने घर में,
    बेटी का दर्जा पा लिया है,
    काश दुनियाँ भर की,
    सभी नारियाँ,
    ऐसी ही होती।"
    नारी का सही रूप यही है।
    अच्छी विवेचना।
    बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  2. टिप्पणीकारों।
    यह रचना मेरी शुरूआती दौर की है।
    बिना किसी संशोधन के इसे प्रकाशित
    किया गया है।
    इसमें की गयी त्रुटियों को
    एक नौसिखिए का भूल समझ
    कर माफ कर देना।

    उत्तर देंहटाएं
  3. आदरणीय शास्त्री जी ,
    सच ही कहा है अपने यदि दुनिया की सभी महिलाएं इस आदर्श को अपना लें ..तो हर घर में जन्नत हो जाये......
    हेमंत कुमार

    उत्तर देंहटाएं
  4. बेहद सटीक रचना. बहुत शुभकामनाएं.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  5. jannat banane ka khyal achcha hai .
    aapse ek gujarish hai agar bura na mane to.
    aapne pahli line mein jo likha hai unki aur unke bachchon ki...........iski jagah agar aap unki aur apne bachchon ki likhte to jyada asardar hota,mera yahi khyal hai kyuki unke bachchon se parayepan ka ahsaas hota hai.
    yeh sirf ek salaah hai agar aapko sahi lage to change kijiyega.
    vaise aapko advice dena thik to nhi hai magar mujhe aisa laga to kah diya.please agar bura lage to shama chahti hun.

    उत्तर देंहटाएं
  6. उनकी और उनके बच्चों की बातें

    सास-ससुर को भी,
    झेलती है,

    bharityae samaj ki rudhivaadi soch ko achcha ubhara haen aap ki kavita nae

    bhartiyae stri ka ghar to janaat ban jaata hae par wo ghar uska kabhie nahin ban paata

    उत्तर देंहटाएं
  7. शास्त्री जी, सचमुच आपने बहुत ही बढिया लिखा है कि एक सुसंस्कारित भारतीय नारी ही घर को स्वर्ग बना सकती है,किन्तु ऊपर की गई टिप्पणी को देख कर मन व्यथित हो गया है और मैं यही सोच कर विस्मित हूं कि भारत वर्ष में इस प्रकार की स्त्रियां भी विधमान है!इन्हे तो ऊपर वाले का शुक्रिया अदा करना चाहिए कि उसने भारत जैसे देश में पैदा किया,जब कि इन्हे तो कहीं अफगानिस्तान या पाकिस्तान जैसे देश में जन्म लेना चाहिए था. फिर पता चलता कि हिन्दुस्तान में नारी को कितना सम्मान दिया जाता है.

    उत्तर देंहटाएं

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