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सोमवार, 6 अप्रैल 2009

"गुरूसहाय भटनागर "बदनाम" की एक गजल" -- प्रस्तुति- डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"


मोहब्बत करने वालों का बुरा अंजाम देखा है।

कहीं पर प्यार का सौदा कोई बेजार देखा है।।


मोहब्बत में जुदाई पर किसी का दिल जला होगा,

कहीं पर गम कहीं आँसू का एक सैलाब देखा है।


ये दुनिया दो दिलों को भी कभी मिलने नहीं देती,

जहां को कत्ल करते दो दिलों का प्यार देखा है।


जो आँसू गम पिये और काट दे फिर जिन्दगी तन्हा,

उन्हें हर मोड़ पर हमने परेशाँ हाल देखा है।


रवायत है यह दुनियां की जिये या खुदकशी कर ले,

कहीं ‘बदनाम’ ने जलता हुआ घर द्वार देखा है।

3 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत लाजवाब गजल. भटनागर साहब को बहुत बधाई और आपका आभार.

    रामराम.

    जवाब देंहटाएं
  2. मोहब्बत में जुदाई पर किसी का दिल जला होगा,
    कहीं पर गम कहीं आँसू का एक सैलाब देखा है।
    bahut sahi kaha aapne. badhai.

    जवाब देंहटाएं

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