"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

सोमवार, 13 अप्रैल 2009

‘‘हमने चाचा की चाची देख ली।’’ (डा0 रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)






कल ही की तो बात है।

मेरे छोटे पुत्र के लिए एक सज्जन अपनी पुत्री के विवाह का

प्रस्ताव लेकर आये।

मैंने उनसे पूछा-

‘‘अपनी बिटिया का फोटो और बायोडाटा तो लाये होंगे।’’

उन्होंने कहा- ‘‘ जी सर! आपके यहाँ नेट हो तो अभी दिखा देता हूँ।’’

मैं उन्हे अपने पी.सी. पर ले गया।

नेट पर उन्होंने बिटिया का फोटो और बायोडाटा दिखा दिया।

मैंने वो अपने कम्प्यूटर पर सेव कर लिया।

शाम को जब परिवार के लोगों को इसे दिखा रहा था तो मेरी

5 वर्षीया पोती प्राची ने मुझसे पूछा- ‘‘बाबा जी ये किसका फोटो है?’’

मैंने उत्तर दिया- ‘‘बेटा! ये तुम्हारी चाची जी का फोटो है।’’

मेरी 5 वर्षीया पोती उछल-उछल कर जोर-जोर से कहने लगी-


‘‘हमने चाचा की चाची देख ली।’’


10 टिप्‍पणियां:

  1. ‘‘हमने चाचा की चाची देख ली।’’

    ये भाषा की स्वाभाविकता है. हमारे यहां हरयाणे मे जब दामाद आता है तो जब कोई पूछता है कि --आपके यहां कौन आया है? तो जवाब मिलता है -- छोरी का छोरा आया है... ये बिल्कुल हकीकत है.

    ये एक सरल और बालसुलभ बात है


    रामराम.

    जवाब देंहटाएं
  2. प्राची तो खुश होगी ही नयी चाची जो मिलेगी और फिर टाफिया भी मिलेगी ।

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत खूब.. बालसुलभ अदा को आपने बहुत अच्छे से परोसा है.. आभार

    जवाब देंहटाएं
  4. bahut hi masum baat keh di,aur pyari si ladoo hai,chacha ki chachi dekh li,:):)

    जवाब देंहटाएं
  5. शास्त्री जी!
    आज तो प्राची जाल जगत पर छा गयी है।

    जवाब देंहटाएं
  6. बधाई बिटिया रानी।
    रोचक संस्मरण।

    जवाब देंहटाएं
  7. और भी इसी तरह के लेख लिखें,
    मयंक जी।

    जवाब देंहटाएं
  8. चाचा की चाची का
    बाल सुलभ संस्मरण अच्छा लगा।
    प्राची का चित्र भी बहुत अच्छा है।

    जवाब देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails