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शनिवार, 28 मार्च 2009

नैनीताल व हरिद्वार की संसदीय सीट कांग्रेस के हाथ से निकल गयी हैं? (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘‘मयंक’’)




चित्र में- पं0 नारायणदत्त तिवारी जी के साथ डा0 के0डी0 पाण्डेय तथा डॉ0 रूपचन्द्र शास्त्री।

क्या उत्तराखण्ड के हरिद्वार और नैनीताल-ऊधमसिंहनगर की संसदीय सीट भा0ज0पा0 की झोली में जाने वाली हैं?


मैं कोई भविष्यवक्ता या नजूमी नही हूँ। लेकिन आकलन तो कर ही सकता हूँ।


पहले हरिद्वार संसदीय सीट की चर्चा करता हूँ। हरिद्वार भा0ज0पा0 का गढ़ माना जाता रहा है। यहाँ से भा0ज0पा0 ने अपना प्रत्याशी स्वामी चिन्मयानन्द को बनाया है। जब तक कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार इस सीट पर घोषित नही किया था तब तक तो यह आँकड़ा लगाया जा रहा था कि यह सीट उसकी झोली में से निकल गयी है। क्योंकि इस सीट पर स्वामी चिन्मयानन्द के मुकाबले मदन कौशिक अधिक लोकप्रिय माने जाते थे। वे इस समय उत्तराखण्ड सरकार में शिक्षामन्त्री भी हैं और उनकी दावेदारी भी मजबूत थी। लेकिन हाई कमान ने उन्हें टिकट नही दिया।


अब बारी कांग्रेस के प्रत्याशी घोषित करने की थी। सो उसने हरीश चन्द्र सिंह रावत के नाम की घोषणा करके यह सीट शायद भा0ज0पा0 को दान में दे दी है।


हरीश रावत के अब तक के आँकड़ों पर नजर डाली जाये तो पता लगता है कि वे अपने गृह जनपद अल्मौड़ा से भी कई बार अपनी सीट बरकरार रखने में असफल साबित हुए हैं। ऐसे में हरिद्वार सीट पर वे विजयी हो सकेंगे। यह तो समय ही बतायेगा।


अब नैनीताल-ऊधमसिंह नगर संसदीय सीट पर नजर डालें तो यह सदैव से ही पं0 नारायणदत्त तिवारी का क्षेत्र रहा है । श्री तिवारी इस सीट पर कई बार विजयी हुए हैं। यद्यपि इस सीट पर टिकट प्राप्त कर चुके श्री के0सी0 सिंह बाबा सिटिंग एम0पी0 हैं। लेकिन जिस समय वे सांसद चुने गये थे । उस समय प्रदेश में कांग्रेस का शासन था और इसके मुखिया पं0 नारायणदत्त तिवारी थे। लेकिन वर्तमान समय में यहाँ भा0ज0पा0 का शासन है। भा0ज0पा0 ने इस सीट से उत्तराखण्ड भा0ज0पा0 के अध्यक्ष श्री बचीसिंह रावत का टिकट पक्का किया है।


यदि इस सीट पर कांग्रेस यहाँ के दिग्गज और वर्तमान में आंध्र-प्रदेश के राज्यपाल पं0 नारायणदत्त तिवारी को अपना प्रत्याशी बना देती तो उसे बिना किसी परिश्रम के यह सीट हाँसिल हो सकती थी।


इसके बाद यदि लोक प्रियता के मापदण्ड पर कोई प्रत्याशी खरा उतर सकता था तो वह पूर्व सांसद डाॅ0 महेन्द्र सिंह पाल हो सकते थे। जो भा0ज0पा0 के बची सिंह रावत को कड़ी टक्कर दे सकते थे।


जहाँ तक के0सी0सिंह बाबा का प्रश्न है वह एक नेक व्यक्ति हैं। परन्तु उनकी लोकप्रियता केवल काशीपुर तक ही सिमट कर रह जाती है। वे वर्तमान में सांसद अवश्य है। पर लोगों को उनसे यह शिकायत है कि वे काशीपुर से बाहर निकलते तक नही हैं। यहाँ तक कि वे पार्टी के कार्यकर्ताओं तक को भी नही पहचानते हैं। अब केवल उंगलियों पर गिने जाने वाले कार्यकर्ताओं के भरोसे तो उनकी नैया पार होने से रही।


अतः समझा यही जा रहा है कि कांग्रेस ने नैनीताल व हरिद्वार की सीटें भा0ज0पा0 को दान कर दीं हैं। यह तो आने वाला कल ही बता पायेगा कि कांग्रेस किस प्रकार इन सीटों पर अपनी साख बचा पाती है।


10 टिप्‍पणियां:

  1. शास्त्री जी, २७ मार्च की पोस्ट से दाहिनी और के शब्द कुछ कट जा रहे हैं. शायद फोर्मेटिंग में कोइ समस्या है. कृपया इसको ठीक करें.

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  2. आपका विश्लेषण अच्छा लगा। कितना सही है, ये देखने के लिए कुछ इंतजार करना पड़ेगा।

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  3. शास्त्री जी।
    आपके ब्लाग पर पं0 नारायणदत्त तिवारी जी के साथ पिता जी का और आपका चित्र देखा, अच्छा लगा।
    D.C.Pandey

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  4. आपने नैनीताल और हरिद्वार संसदीय सीट का सही विश्लेषण प्रस्तुत किया है। बधाई।

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  5. शास्त्री जी!
    आपका चुनावी सर्वेक्षण शायद सही हो। कुछ दिनों बाद ही निष्कर्ष का पता लग जायेगा।

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  6. मयंक जी!
    आपकी कलम से नैनीताल और हरिद्वार का विश्लेषण तर्क की कसौटी पर खरा उतरता है।

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  7. सही परख तो नतीजे
    आने पर ही होगी।

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  8. पूत के पाँव पालने मे ही नजर आने लगते हैं। इसी लिए कांग्रेस पिछड़ रही है।

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  9. चुनावी विश्लेषण तथ्यों से परिपूर्ण है।
    बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  10. आपका आंकलन बिलकुल सही है...यही होने वाला है ...

    जवाब देंहटाएं

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