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रविवार, 15 मार्च 2009

साहित्य शारदा मंच, खटीमा के तत्वावधान में कवि-गोष्ठी संपन्न





होली आती है


साहित्य शारदा मंच, खटीमा के तत्वावधान में
राष्ट्रीय वैदिक विद्यालय के सभागार में

वरिष्ठ नागरिक सतपाल बत्तरा की अध्यक्षता में

एक कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया।


गोष्ठी का शुभारम्भ

मुख्य अतिथि प्रह्लाद नारायण सक्सेना ने

माँ शारदे के सम्मुख दीप प्रज्वलन द्वारा किया।
सबसे पहले हास्य तथा व्यंगकार कवि

गेंदालाल शर्मा निर्जन ने सरस्वती वन्दना

प्रस्तुत की तत्पश्चात उन्होंने चुनावी-उम्मीदवारों

पर व्यंग कसते हुए कहा-

‘‘देखो अब आया चुनाव, दिन-प्रतिदिन बादल गरजेंगे।
राजनीति के कलाकार, अब द्वार-द्वार पर थिरकेंगे।’’

इनकी अन्य कविताएँ पढ़ने

के लिए निर्जन पर क्लिक् कीजिए।
नयी कविता के सशक्त हस्ताक्षर डॉ0 सिद्धेश्वर सिंह ने

अपनी लम्बी कविता ‘उत्सर्ग-ऐक्सप्रेस’ सुनाई।

इस कविता में तमसा नदी के किनारे बसे

आजमगढ़ जनपद का परिवेश बखूबी उभर कर

अपनी कहानी कहता दिखाई दिया।

इनकी अन्य रचनाएँ पढ़ने के लिए

डॉ0 सिद्धेश्वर सिंह पर क्लिक् कीजिए।
अंतरजाल पत्रिका ‘‘सरस-पायस’’ के


होली गीत सुनाया-

‘‘आशा ही आशा लेकर होली आती है,

मन के उपवन में फूलों-सी सज जाती है।’’


इसके बाद बेटियों पर

एक कविता सुनाते हुए उन्होंने कहा-

‘‘बसन्त आता है -

जब घर में जन्म लेती है बिटिया।’’

रावेंद्रकुमार रवि की ये कविताएँ पूरी पढ़ने

के लिेए क्रमश:


पर क्लिक् कीजिए।

साहित्य शारदा मंच, खटीमा के


अपने गाँव की स्मृतियों को ताजा करते हुए कहा-

‘‘टेसू के फूलों से गुंथित तीन पात की हर डाली है,

घर के पीछे हरियाली है, लगता मानो खुशहाली है।’’


इसके बाद उन्होंने यह होली गीत सुनाया-

"होली का हुड़दंग मचा है, गाँव-गली, घर-द्वारों में,

ठण्डाई और भंग घुट रही, आँगन और चौबारों में।"


ये कविताएँ पूरी पढ़ने के लिए

क्रमश: टेसू और हुड़दंग पर क्लिक् कीजिए।
गोष्ठी का संचालन हिन्दी प्रवक्ता डॉ0 गंगाधर राय ने किया।


गोष्ठी का छायांकन रावेंद्रकुमार रवि ने किया।

अंत में डॉ0 रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

ने सभी का आभार प्रदशित किया।

10 टिप्‍पणियां:

  1. कमाल है साहब तकनीक का कारनामा. बस आपके यहाँ से आकर बाजार असे कुछ जरूरी मालमत्ता जुटाकर अभी ठीक से घर में व्यवस्थित होने का उपक्रम कर ही रहा था कि क्या देखता हूँ कि आज की रपट तो लग गई. अच्छा लगा यह देखकर .
    अच्छी पोस्ट आपकी तत्परता, सौहार्द्र और रवि जी की कलाकारी को साधुवाद!

    यह बैठक एक तरह से ब्लागर मीट भी रही - गांव में ब्लागर मीट!
    क्या बात है
    बधाई !!

    जवाब देंहटाएं
  2. साहित्य शारदा मंच द्वारा कवि गोष्ठी
    की रपट और छायांकन बहुत अच्छा लगा।
    मेरी बधाई स्वीकार करें ।

    जवाब देंहटाएं
  3. शास्त्री जी।
    आपने कवि गोष्ठी की कवरेज
    को सुन्दर ढंग से प्रस्तुत किया है।
    रावेंद्रकुमार रवि का चित्रांकन
    प्रभावित करने वाला है।
    मेरी शुभकामनाएँ।

    जवाब देंहटाएं
  4. मयंक जी।
    ब्लाग पर कवि-गोष्ठी की रपट
    देख कर अच्छा लगा।
    आपने खटीमा जैसे छोटे शहर
    को भी इण्टरनेट पर चमका दिया है।
    मुबारकवाद।

    जवाब देंहटाएं
  5. उच्चारण ब्लाग पर
    साहित्यिक गतिविधियाँ
    देख कर मन प्रसन्न हुआ।

    जवाब देंहटाएं
  6. मयंक जी।
    आपने खटीमा का नाम
    अंतर्राष्टीय कर दिया है।
    साथ ही आपके ब्लाग का
    भी प्रारूप अच्छा बन पड़ा है।
    बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  7. यह देख कर अच्छा लगा कि
    भारत में खटीमा भी कोई शहर है।
    जहाँ साहित्यिक गतिविधियाँ होती रहती हंै।
    सभी साहित्यकारों को
    होली की शुभकामनाएँ

    जवाब देंहटाएं
  8. तकनीक का कारनामा.
    क्या बात है
    बधाई स्वीकार करें ।

    जवाब देंहटाएं
  9. रपट अच्छी लगी सर जी तस्वीर के माध्यम से सब जीवंत सा लगा ।

    जवाब देंहटाएं

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