"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

मंगलवार, 17 मार्च 2009

सेना में भर्ती कर लो, कुछ खादी वर्दी वालों को। (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक)

ए-के सैंतालीस, अस्त्र-शस्त्र, बेकार सभी हो जायेंगे।

अणु और परमाणु-बम भी, सफल नही हो पायेंगे।।

सागर में डुबो फेंक दो अब, तलवार तोप और भालों को।

सेना में भर्ती कर लो, कुछ खादी वर्दी वालों को।।

शासन से कह दो अब, करना सेना का निर्माण नही।

छाँट-छाँट कर वीर-सजीले, भरती करना ज्वान नही।।

फौजों का निर्माण, शान्त उपवन में आग लगा देगा।

उज्जवल धवल पताका में, यह काला दाग लगा देगा।

नही चाहिए युद्ध-भूमि में, कुछ भी सैन्य सामान हमें।

युद्ध-क्षेत्र में, कर्म-क्षेत्र में, करना है आराम हमें।।

शत्रु नही भयभीत कदापि, तोप, टैंक और गोलों से।

इनको भय लगता है केवल, नेताओं के बोलों से।।

रण-भूमि में कुछ कारीगर, मंच बनाने वाले हों।

लाउड-स्पीकर शत्रु के दिल को दहलाने वाले हों।।

सजे-धजे अब युद्ध-मंच पर, नेता अस्त्र-शस्त्र होंगे।

सिर पर शान्ति-ध्वजा टोपी, खादी के धवल-वस्त्र होंगे।

गोलों की गति से जब नेता, भाषण ज्वाला उगलेंगे।

तरस बुढ़ापे पर खाकर, शत्रु के दिल भी पिघलेंगे।।

मोतिया-बिन्द वाली आँखों से, वैरी नही बच पायेगा।

भारी-भरकम भाषण से ही, जीते-जी मर जायेगा।।

सेना में इन बुड्ढों को, जौहर दिखलाना भायेगा।

युवकों के दिन बीत गये, बुड्ढों का जमाना आयेगा।।

14 टिप्‍पणियां:

  1. सेना में इन बुड्ढों को, जौहर दिखलाना भायेगा।

    युवकों के दिन बीत गये, बुड्ढों का जमाना आयेगा।।


    वाह सर जी क्या बात कही है? बधाई..

    रामराम..

    उत्तर देंहटाएं
  2. सागर में डुबो फेंक दो अब, तलवार तोप और भालों को।
    सेना में भर्ती कर लो, कुछ खादी वर्दी वालों को।।
    बिलकुल सही सलाह दी है आपने.

    उत्तर देंहटाएं
  3. भाई चन्दन चौहान जी
    आपने बिल्कुल सही फरमाया।
    यही चेताने के लिए यह रचना लगाई हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  4. प्रिय शास्त्री जी।
    नेताओं पर किया गया व्यंग अच्छा लगा।
    इन नेताओं ने ही देश का बेड़ा गर्क किया है।

    उत्तर देंहटाएं
  5. मयंक जी।
    हास्य-व्यंग्य की दुनिया में आपका स्वागत है।
    मैं भी हास्य-व्यंग्य ही अधिक लिखता हूँ।

    उत्तर देंहटाएं
  6. आपने नेताओं को युद्धक्षेत्र मे भिजवा कर,
    उनका सफाया करने का अच्छा मन्त्र सुझाया है। धन्यवाद।

    उत्तर देंहटाएं
  7. बिलकुल सही सलाह.
    व्यंग अच्छा लगा।

    उत्तर देंहटाएं
  8. सब नेताओं को कच्छ की रणभूमि में भेज दो।
    देश का भला हो जायेगा।
    बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  9. आदरणीय शास्त्री जी ,
    बहुत ही अच्छा और प्रासंगिक व्यंग्य है.
    इसे तो हमारे देश के हर खद्दरधारी को पढना चाहिए .
    मेरे ब्लॉग पर आने के लिए शुक्रिया .आपकी गीतमय टिप्पणियां मेरा उत्साह बढाती हैं .
    हेमंत कुमार

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails