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गुरुवार, 26 मार्च 2009

निर्वाचन (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘‘मयंक’’)




भारत की महानता का, नही है अतीत याद,

वोट माँगने को, अभिनेता को बुलाया है।

देश का कहाँ है ध्यान, होता नित्य सुरापान,

जाति, धर्म, प्रान्त जैसे, मुद्दों को भुनाया है।

आज युवराज चल पड़े, गलियों की ओर-

निर्वाचन के दौर ने, ये दिन भी दिखाया है।



13 टिप्‍पणियां:

  1. चुनाव हो जाने दिजिये. फ़िर यही युवराज जो गलियों मे घूम रहे हैं आपको सिर्फ़ टी.वी> पर नजर आयेंगे. बहुत सटीक लिखा आपने.

    रामराम.

    जवाब देंहटाएं
  2. आज युवराज चल पड़े, गलियों की ओर-

    निर्वाचन के दौर ने, ये दिन भी दिखाया है।
    bahut sahi satik kaha,,bahut khub

    जवाब देंहटाएं
  3. ज़ोरदार व्यंग्य कसा है!

    जवाब देंहटाएं
  4. व्यंग्य धारदार ही नहीं सार्थक भी है !

    जवाब देंहटाएं
  5. मयंक जी। आपका व्यंग
    आजकल के माहौल में खरा उतरता है।
    आप बधाई के पात्र हैं।

    जवाब देंहटाएं
  6. शास्त्री जी।
    बहुत दिनों बाद आपने
    अपने ब्लाग पर व्यंग प्रकाशित किया है।
    बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  7. मयंक जी।
    संस्मरण के साथ-साथ एक
    कविता भी रोज प्रकाशित किया करें।
    बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  8. Sir जी। आप की लेखनी सशक्त है। आप यूँ ही लिखते रहें।
    व्यंग के लिए बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  9. बढ़िया है साहब.
    ==================
    डॉ.चन्द्रकुमार जैन

    जवाब देंहटाएं
  10. सत्ता की जंग में देखीये,
    भाई को भाई से लड़ाया है.
    दो फ्रंट से काम चल रहा था
    पर अब तीसरा फ्रंट बनाया है.
    :)


    जो हो कम है!

    जवाब देंहटाएं

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