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मंगलवार, 9 जून 2009

‘‘टेली-विजन’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

मेरा टी0वी0 है अनमोल।

खोल रहा दुनिया की पोल।।


इसमें चैनल एक हजार।

इसके बिन जीवन बेकार।।


कितना प्यारा और सलोना।

बच्चों का ये एक खिलौना।।


समाचार इसमें हैं आते।

कार्टून हैं खूब हँसाते।।


गीत और संगीत सुनाता।

पल-पल की घटना बतलाता।।




बस रिमोट का बटन दबाओ।

मनचाहा चैनल पा जाओ।।


यह सबके मन को भाता है।
क्रि-केट, कुश्ती दिखलाता है।।



नृत्य सिखाता, मन बहलाता।

नये-नये पकवान बताता।।


नई-नई कारों को देखो।

जगमग त्योहारों को देखो।।


नये-नये देखो परिधान।

टेली-विजन बहुत महान।।

(रिमोट, कार और त्योहार के चित्र गूगल सर्च से साभार)

13 टिप्‍पणियां:

  1. बढ़िया बाल कविता रची जा रही हैं, बधाई.

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  2. बच्चों के लिए अनुकूल कविता। मयंक जी इस बीच आपकी कई बाल कविता देखने को मिली।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    www.manoramsuman.blogspot.com
    shyamalsuman@gmail.com

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत बढिया कविता है शाश्तीजी. काश हम भी अब बच्चे बन जायें.

    रामराम

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  4. अनिल घर चल,
    उधर मत जा।
    भोजन कर,
    शोर मत कर्॥

    मज़ा आ गया शास्त्री जी प्राईमरी स्कूल याद दिला दी।

    जवाब देंहटाएं
  5. गुण और दोषों से परिपूर्ण यह प्रणाली सचमुच एक महान आविष्कार है

    जवाब देंहटाएं
  6. बहुत खूब .. अच्छी बाल कविता है.. आपको बाल कविता संग्रह को प्रकाशित कराने पर विचार करना चाहिए..

    जवाब देंहटाएं
  7. बच्‍चों को गर्मी की छुट्टियां, और आपके द्वारा उनका गहन अवलोकन किया जा रहा है तभी तो नित नई बाल कविताएं रच कर प्रसन्‍न कर रहे हैं बच्‍चों को, एक बार फिर से बधाई बाल कविता के लिए ।

    जवाब देंहटाएं
  8. badhiya baal kavita.........bachche to khush ho jayenge.

    जवाब देंहटाएं
  9. बहुत सुन्दर बाल कविता के लिये बधाई

    जवाब देंहटाएं
  10. बहुत बढ़िया साहब.आजकल खूब बाल कवितयें लिख रहे है. बहुत खूब !

    जवाब देंहटाएं

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