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रविवार, 21 जून 2009

‘‘वफादार है बड़े काम का’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)



आज अपने प्यारे कुत्ते "टॉम" पर

एक बाल कविता लिखी तो

मेरी पोती "फिरंगी" पर भी

एक बाल-कविता लिखने की जिद करने लगी।

उसी की फरमाइश पर प्रस्तुत है यह बाल-कविता-

यह कुत्ता है बड़ा शिकारी।

बिल्ली का दुश्मन है भारी।।


बन्दर अगर इसे दिख जाता।

भौंक-भौंक कर उसे भगाता।।


उछल-उछल कर दौड़ लगाता।

बॉल पकड़ कर जल्दी लाता।।


यह सीधा-सच्चा लगता है।

बच्चों को अच्छा लगता है।।


धवल दूध सा तन है सारा।

इसका नाम फिरंगी प्यारा।।


आँखें इसकी चमकीली हैं।

भूरी सी हैं और नीली हैं।।


जग जाता है यह आहट से।

साथ-साथ चल पड़ता झट से।।


प्यारा सा पिल्ला ले आना।

सुवह शाम इसको टहलाना।।


नौकर है यह बिना दाम का।

वफादार है बड़े काम का।।

10 टिप्‍पणियां:

  1. मयंक जी बहुत खूब आजकल तो नाती पोतिओं की फर्माईश ही पूरी नहीं हो रही छुटियाँ जो हैं बहुत प्यारे बच्चे हैं और कविता भी बहुत सुन्दर है फिरंगी का ही शुक्रिया करूँगी न वो ना कहती तो इतनी अच्छी कविता भि न लिखी जाती बधाई

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  2. बहुत अच्छा लिखा आपने,

    मन करता है खूब पढ़ूँ,
    दोहराउँ मैं बारम्बार,
    आप की कविता दिल छूती है,
    याद दिलाती है बचपन की.

    जवाब देंहटाएं
  3. सुंदर अति सुंदर कविता.

    रामराम.

    जवाब देंहटाएं
  4. bahut hi sundar ...........kawita ke panktiyo me rawani hai.

    जवाब देंहटाएं
  5. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    जवाब देंहटाएं
  6. बहुत ही सुन्‍दर बाल कविता लिखी आपने, बच्‍चे तो खुश हुये ही होंगे, हमें भी बहुत अच्‍छी लगी, बधाई

    जवाब देंहटाएं
  7. bhai firngi to bada dulara hai jo us par kvita bhi ho gai .
    bdi pyari kavita badhai

    जवाब देंहटाएं

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