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शनिवार, 13 जून 2009

मच्छर-दानी (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)


जिसमें नींद चैन की आती।

वो मच्छर-दानी कहलाती।।

लाल-गुलाबी और हैं धानी।

नीली-पीली बड़ी सुहानी।।

छोटी, बड़ी और दरम्यानी।

कई तरह की मच्छर-दानी।।

इसको खोलो और लगाओ।

बिस्तर पर सुख से सो जाओ।।

जब ठण्डक कम हो जाती है।

गरमी और बारिश आती है।।

तब मच्छर हैं बहुत सताते।

भिन-भिन करके शोर मचाते।।

खून चूस कर दम लेते हैं।

डेंगू-फीवर कर देते हैं।।

मच्छर से छुटकारा पाओ।

मच्छरदानी को अपनाओ।।

13 टिप्‍पणियां:

  1. machhardani ke liye achchha add ho sakata hai........sundar rachna

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  2. बहुत ही सुंदर।
    इसके बिना मुझे भी नींद नहीं आती। न लगी हो तो लगता है कहीं खुले में सो रहे हैं। वैसे तरह-तरह के धूओं, गैसों तथा रसायनों से हमें भी बचाती है और पैसों को भी।

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  3. बढिया है.तस्वीरों से रचना में जान आ गई. बहुत सुन्दर.

    जवाब देंहटाएं
  4. वाह! बच्चों को आपकी ये कविता पढ़ानी चाहिए।

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  5. बहुत बडिया आप रोज़ रोज़ बच्चों को नयी नयी चीज़ों से रुबरु करवाते है कविता के रूप मे बच्चों के लिये याद रखना बहुत आसान हो जाता है आभार्

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  6. बहुत बेहतरीन कविता. मच्छर जी का चित्र देखकर तो रौंगटे खडे होगये.

    रामराम.

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  7. सुन्दर रचना...तस्वीर तो बस सजीव लग रही है

    जवाब देंहटाएं
  8. नासवा जी और वन्दना जी।
    मच्छरदानी की तस्वीर
    मेरे खुद के बैड की है।

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  9. machchardani ka ati sundar varnan kiya hai ........bahut badhiya.

    जवाब देंहटाएं
  10. मच्छर दानी की भी कविता.. बहुत खुब कविता..

    बधाई

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  11. मच्छरदानी की महिमा दर्शनीय है,बधाई हो.

    मच्छर की मर जाए नानी,
    लगा के सोओ मच्छर दानी.

    जवाब देंहटाएं

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