"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

फ़ॉलोअर

शुक्रवार, 5 जून 2009

पेंसिल (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


रंग-बिरंगी पेंसिलें, बच्चों को बहुत लुभाती है।

वो इनसे क,ख,ग, ए,बी,सी,डी भी लिखवाती हैं।।

रेखाचित्र बनाना, इसके बिना असम्भव होता है।

कला बनाना, केवल इससे ही सम्भव होता है।।

गल्ती हो जाये तो, लेकर रबड़ तुरन्त मिटा डालो।

गुणा-भाग करना चाहो तो, बस्ते में से इसे निकालो।।

छोटी हो या बड़ी क्लास हो, काम सभी में आती है।

इसे छीलते रहो कटर से, यह चलती ही जाती है।।

तख्ती,कलम,स्लेट का,बिल्कुल इसने किया सफाया है।

समय पुराना बीत गया, अब नया जमाना आया है।।
(चित्र गूगल सर्च से साभार)

4 टिप्‍पणियां:

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails