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शनिवार, 6 जून 2009

"तब समझो कोई जीवन में आया है" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)


तब समझो कोई जीवन में आया है।
जिसने बीराने में सुमन खिलाया है।।

उनके आभासो की गंध महकती हो,
अधरों पर बरबस मुस्कान बहकती हो।
साँसों की गरमी पैदल चल कर पहुँचे,
कोयल जैसी वाणी चटक चहकती हो।
तब समझो कोई जीवन में आया है।
जिसने बीराने में सुमन खिलाया है।।

पीड़ा की ललकार, कहानी कहती हो
बन कर के पतवार, निशानी रहती है।
आँखों में सागर जैसा खारा जल हो,
दरिया की मानिन्द, जवानी बहती हो।।
तब समझो कोई जीवन में आया है।
जिसने बीराने में सुमन खिलाया है।।

जब कुछ कहने-सुनने में लाचारी हो,
एकाकीपन में जीना जब भारी हो।
सूना-सूना सा संसार लगे सारा,
जब मन बन जाये दरवेश भिखारी हो।
तब समझो कोई जीवन में आया है।
जिसने बीराने में सुमन खिलाया है।।

जब तन-मन लेता हो अल्हड़ अंगड़ाई,
उर की बगिया में छाई हो अमराई।
जब शीतल चन्दा भी नही सुहाता हो,
मन के नभ पर बदली जैसी हो छाई।।
तब समझो कोई जीवन में आया है।
जिसने बीराने में सुमन खिलाया है।।

8 टिप्‍पणियां:

  1. मयंक जी।
    बाल कविताओं के बाद कई दिनों में अपने रंग मे दिखाई दिए हो।
    सुन्दर गीत के लिए बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत बढ़िया काव्य है, हमेशा कुछ रोचक लिखते हैं

    तकनीक दृष्टा

    जवाब देंहटाएं
  3. शास्त्री जी............ सुन्दर रचना है आज बहुत...... ओज है आज.... बल कविता में तो आप लाजवाब हैं ही...........प्रणाम है मेरा

    जवाब देंहटाएं
  4. बड़े भाई
    बेहतर रचना .बधाई

    जब तन-मन लेता हो अल्हड़ अंगड़ाई,
    उर की बगिया में छाई हो अमराई।
    जब शीतल चन्दा भी नही सुहाता हो,
    मन के नभ पर बदली जैसी हो छाई।।
    तब समझो कोई जीवन में आया है।
    जिसने बीराने में सुमन खिलाया है।।

    जवाब देंहटाएं
  5. aapne ye kya likh dala hai
    tan man ko choo dala hai
    har rang ismein bhar dala hai
    sach , virane mein suman khila dala hai

    जवाब देंहटाएं

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