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बुधवार, 24 जून 2009

‘‘शत्रुता से भरे फासले कम करो’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)



देश में द्वेष के दाखले कम करो।

शत्रुता से भरे फासले कम करो।।


रोशनी के लिए दीप रोशन करो,

प्रीत की गन्ध को मन-सुमन में भरो,

क्रूरता से भरे काफिले कम करो।

शत्रुता से भरे फासले कम करो।।


मत उलझना जमाने के जंजाल में,

रंग में ढंग में, चाल में-ढाल में,

सिरफिरे कम करो, दिलजले कम करो।

शत्रुता से भरे फासले कम करो।।

(मुखड़े के लिए श्री यू.आर.मीत का आभार)

15 टिप्‍पणियां:

  1. waah ji waah
    atyant uttam vichaar
    atyant uttam kavita ...............badhaai !

    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत सुंदर विचार है.

    रामराम.

    जवाब देंहटाएं
  3. अति सुंदर विचार काश सब माने यह बात तो कितना अच्छा हो.
    धन्यवाद

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत सुन्दर रचना है।रचना द्वारा अपने विचारो की अभिव्यक्ति बहुत सुन्दर ढंग से की है बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  5. क्रूरता से भरे काफिले कम करो।
    शत्रुता से भरे फासले कम करो।।
    सामयिक विचार और सुन्दर कविता, धन्यवाद!

    जवाब देंहटाएं
  6. क्रूरता से भरे काफिले कम करो।

    शत्रुता से भरे फासले कम करो।।

    मत उलझना जमाने के जंजाल में,

    रंग में ढंग में, चाल में-ढाल में,

    Bade bhai,
    bahut hi sundar bhav jagaane ka kaam kar rahe hain.

    जवाब देंहटाएं
  7. आपके विचार इस वक्त के हिन्दोस्तान की जरूरत है .

    अच्छे विचार और कविता .
    हमेशा की तरह .
    मिलते रहें .

    जवाब देंहटाएं
  8. बेहतरीन प्रस्‍तुति, आभार

    जवाब देंहटाएं
  9. अत्यंत सुन्दर रचना

    जवाब देंहटाएं
  10. वाह वाह बहुत सुन्दर सार्थक और प्रेरक अभिव्यक्ति है आभार्

    जवाब देंहटाएं

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