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मंगलवार, 30 जून 2009

‘‘भावी पीढ़ी को उनका, सुखमय जीवन जीने देना’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)


बचपन बीता गयी जवानी, कठिन बुढ़ापा आया।

कितना है नादान मनुज, यह चक्र समझ नही पाया।


अंग शिथिल हैं, दुर्बल तन है, रसना बनी सबल है।

आशाएँ और अभिलाषाएँ, बढ़ती जाती प्रति-पल हैं।।


धीरज और विश्वास संजो कर, रखना अपने मन में।

रंग-बिरंगे सुमन खिलेंगे, घर, आंगन, उपवन में।।


यही बुढ़ापा अनुभव के, मोती लेकर आया है।

नाती-पोतों की किलकारी, जीवन में लाया है।।


मतलब की दुनिया मे, अपने कदम संभल कर धरना।

वाणी पर अंकुश रखना, टोका-टाकी मत करना।।


देख-भालकर, सोच-समझकर, ही सारे निर्णय लेना।

भावी पीढ़ी को उनका, सुखमय जीवन जीने देना।।

14 टिप्‍पणियां:

  1. लयबद्ध गीतों को चुटकियों में रच देने में आपका जवाब नहीं

    जवाब देंहटाएं
  2. सुंदर रचना,
    अनुभव का सागर ले कर के, सधा बुढ़ापा आता है,
    काम वही करता है जो धन, सारी उमर कमाता है,
    यह भविष्य का सुंदर पल है,जो सब को ही घेरेगा,
    जितना अच्छा जो करता है,वही बुढ़ापे मे पाता है.

    जवाब देंहटाएं
  3. जीवन को बहुत गहराई से महसूसा है आपने।

    -Zakir Ali ‘Rajnish’
    { Secretary-TSALIIM & SBAI }

    जवाब देंहटाएं
  4. जीवन की सच्‍चाई को बहुत ही गहरे भावों से व्‍यक्‍त किया है आपने, आभार ।

    जवाब देंहटाएं
  5. aaderneey....
    shastri ji.........

    aapne jeevan ki sachhiyo ko jis tarah kalbadh kiya hai. vah kabile tareef hai...

    aapne jo mera hosla badaya....uske liye dil se aabhar...

    asha karta hun aap aage bhi isi tarah meri hoslaafzai aour margdarshan karte rahenge.....

    जवाब देंहटाएं
  6. आप न केवल अच्छा लिखते हैं, वरन गम्भीर बात को भी सहजता से कह डालते हैं. बधाई.

    जवाब देंहटाएं
  7. जीवन की सार्थक सच्चाई
    बहुत खूबसूरत

    जवाब देंहटाएं
  8. आप ने एक सच को कविता का रुप दे कर समझाया.
    धन्यवाद

    जवाब देंहटाएं
  9. सीख देती सरल सुन्दर और सार्थक अभिव्यक्ति आप एक उत्कृश्ठ शब्दशिल्पी हैण बधाई इस बडिया रचना के लिये्

    जवाब देंहटाएं

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