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रविवार, 28 जून 2009

‘‘बादल आये हैं’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)



सागर में से भर कर निर्मल जल को लाये हैं।

झूम-झूम कर नाचो-गाओ, बादल आये हैं।।


गरमी ने लोगों के तन-मन को झुलसाया है,

बहुत दिनों के बाद मेघ ने दरस दिखाया है,

जग की प्यास बुझाने को ये छागल लाये हैं।

झूम-झूम कर नाचो-गाओ, बादल आये हैं।।


नाच रहे पेड़ों के पत्ते, पुरवैया के झोंको से,

शीतल पवन दे रही दस्तक, खिड़की और झरोखों से,

खेत-बाग के व्याकुल-मन हर्षित हो मुस्काये हैं।

झूम-झूम कर नाचो-गाओ, बादल आये हैं।।


धरती की भर गयी दरारें, वर्षा के आने से,

खिले किसानों के चेहरे, नभ पर बादल छाने से,

अब हरियाली छा जायेगी, ये आस लगाये हैं।

झूम-झूम कर नाचो-गाओ, बादल आये हैं।।


8 टिप्‍पणियां:

  1. अब हरियाली छा जाएगी,आस लगाए है,
    झूम-झूम कर नाचो-गाओ, बादल आये हैं।।
    कई दिनो से प्यास जगी थी,प्यास बुझाए है,
    झूम-झूम कर नाचो-गाओ, बादल आये हैं।।

    सुंदर सुंदर कविताओं से भाव जगाएँ है,
    मुझे तो लगता,इस बदल को आप बुलाएँ है,
    झूम-झूम कर नाचो-गाओ, बादल आये हैं।।

    जवाब देंहटाएं
  2. विनोद कुमार पांडेय जी।

    "अब हरियाली छा जाएगी,आस लगाए है,"

    यह पंक्ति सुझाने के लिए आपका आभार।

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत सुंदर कविता .. सचमुच नाचने गाने की बारी आ गयी है .. आसमान में बादल आ चुके हैं।

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत सुंदर, शायद ्मेघ राज आप की कविता पढ कर मेहरबान हो जाये,
    बहुत ही सुंदर कविता.
    धन्यवाद

    जवाब देंहटाएं
  5. khoob barsaaya ras ka baadal aapne...

    anand aa gaya.
    dhnyavaad !

    जवाब देंहटाएं
  6. sundar गीत varshaa raani के स्वागत में............. badhaai shaashtri जी

    जवाब देंहटाएं
  7. कविता पढ़कर गर्मी से थोड़ी राहत महसूस हुई

    ---
    चाँद, बादल और शामगुलाबी कोंपलें

    जवाब देंहटाएं

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