"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

फ़ॉलोअर

मंगलवार, 23 जून 2009

‘‘दिल’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)



दिल है शीशे सा नाजुक हमारा प्रिये!


ठेस लगते ही यह तो चटक जायेगा।


प्रीत का खाद-पानी पिलाओ इसे,


प्यार पाते ही यह तो मटक जायेगा।।



फूल सा खिल रहा यह तुम्हारे लिए,


दीप सा जल रहा यह तुम्हारे लिए,


झूठी तारीफ से यह भटक जायेगा।


प्रीत का खाद-पानी पिलाओ इसे,


प्यार पाते ही यह तो मटक जायेगा।।



मन जरूरत से ज्यादा सरल है प्रिये,


दुर्जनों के लिए ये गरल है प्रिये,


नेह के गेह में ये अटक जायेगा।


प्रीत का खाद-पानी पिलाओ इसे,


प्यार पाते ही यह तो मटक जायेगा।।



मस्त रहता भ्रमर पुष्प की गन्ध में,


मन बंधा भावनाओं के सम्बन्ध में,


प्यार में यह हलाहल गटक जायेगा।


प्रीत का खाद-पानी पिलाओ इसे,

प्यार पाते ही यह तो मटक जायेगा।।


(चित्र गूगल सर्च से साभार)

13 टिप्‍पणियां:

  1. मस्‍त रहता भ्रमर पुष्‍प की गंध में,
    मन बंधा भावनाओं के सम्‍बंध में,
    प्‍यार में यह हलाहल गटक जाएगा ।

    उत्‍तम ही नहीं अतिउत्‍तम, बहुत ही सुन्‍दर रचना, आभार ।

    जवाब देंहटाएं
  2. aaj toh aapne matkaa hi diya...............
    itnee sundar ,itnee umdaa kavita likhnaa kahan sikhaya jata hai zaraa hamen bhi toh bataaiye........do line hum bhi dhang ki likhlen

    adbhut !
    anupam !
    saras kavita ! waah waah

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर भाव्मय कविता है बधाई

    जवाब देंहटाएं
  4. वाह शास्त्री जी, आप तो बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं .इतनी सुन्दर तुकबन्दी....मज़ा आ गया.

    जवाब देंहटाएं
  5. भावपूर्ण कविता – बहुत अच्छी

    जवाब देंहटाएं
  6. बहुत लाजवाब और सुंदर. पर जरा अब दिल को संभालकर रखा किजिये.:)

    रामराम.

    जवाब देंहटाएं
  7. waah is umar ye shbada our bhaw ka samaayojan ki padhakar enrgy paida kar di........

    जवाब देंहटाएं
  8. ताऊ ।
    नेक सलाह के लिए धन्यवाद।
    ओम आर्य जी।
    कविता का रिश्ता उम्र से भी होता है क्या?

    जवाब देंहटाएं
  9. वाह वाह! क्या बात है मयंक जी!!

    जवाब देंहटाएं
  10. bahut hi pyar bhara , bhavmayi , premgeet likha hai .......dil wakai bada nazuk hota hai.

    dil se na khelo khel priye
    khilona nhi ye chatak jayega
    dil ko sambhalo dil hai priye
    bin preet ye to bhatak jayega

    जवाब देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails