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मंगलवार, 28 जुलाई 2009

‘‘हसीन ख्वाब’’ (डा0 रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)


इक हादसे में उनसे मुलाकात हो गयी।
रोज-रोज मिलने की शुरूआत हो गई।।

देखा उन्हें मगर न कोई बात कर सके,
केवल नजर मिली, नजर में बात हो गयी।
रोज-रोज मिलने की शुरूआत हो गई।।

वो भी थे बेकरार और हम भी थे गरजमन्द,
दोनो के लिए प्रेम की सौगात हो गयी।
रोज-रोज मिलने की शुरूआत हो गई।।

इक दूजे के जज्बात दोनो तोलते रहे,
हम डाल-डाल थे वो पात-पात हो गयी।
रोज-रोज मिलने की शुरूआत हो गई।।

खाई थी खेल में उन्होंने शह हजार बार,
जब अन्त आ गया तो मेरी मात हो गई।
रोज-रोज मिलने की शुरूआत हो गई।।

धूप-छाँव के चले थे सिलसिले बहुत,
मंजिल के बीच में ही तो बरसात हो गई।
रोज-रोज मिलने की शुरूआत हो गई।।

साया तलाशते रहे हम तो तमाम दिन,
केवल इसी उधेड़-बुन में रात हो गई।
रोज-रोज मिलने की शुरूआत हो गई।।

आँखें खुली हसीन ख्वाब टूट गया था,
सूरज चढ़ा हुआ था और प्रात हो गई।
रोज-रोज मिलने की शुरूआत हो गई।।


11 टिप्‍पणियां:

  1. क्या खूब लपेटा है दादा इस उम्र में लाजबाब...

    उत्तर देंहटाएं
  2. महेन्द्र मिश्र जी!
    कविता या शायरी का
    उम्र से भी रिश्ता होता है क्या?
    मन पर भी कभी बुढ़ापा आता है क्या?
    आपके जज्बात की कद्र करता हूँ।
    लेकिन प्रश्न अपनी जगह पर जरूर है।

    उत्तर देंहटाएं
  3. मेरे खयाल से कविता ताउम्र होती है -- उम्र से इसका रिश्ता नही होता. गुस्ताखी माफ....
    बहुत अच्छी रचना
    मोहक

    उत्तर देंहटाएं
  4. kamaal ki kaarigari
    shabdon ki bhi
    aur
    shilp ki bhi
    waah !
    waah !
    anand aa gaya.............
    aapko badhaai antar se
    khoob badhaaiji..................

    उत्तर देंहटाएं
  5. वाह शाश्त्रीजी सही कहा. दिल हमेशा जवान रहें, बुढापा शरीर को आता है. भावनाएं और मन तो आदमी की अपनी सोच है. शानदार रचना. बहुत शुभकामनाएं.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत बढ़िया लगा! अत्यन्त सुंदर रचना!

    उत्तर देंहटाएं
  7. khwab mein hi unke deedar ho gaye
    bina dekhe bhi nazrein char ho gayin
    roj roj milne ki shuruaat ho gayi


    shandar likha hai.........khwab wakai bahut haseen hai.

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत सुन्दर रचना शास्त्रीजी और रचना से भी अधिक सुन्दर आपका यह जबाब :

    महेन्द्र मिश्र जी!
    कविता या शायरी का
    उम्र से भी रिश्ता होता है क्या?
    मन पर भी कभी बुढ़ापा आता है क्या?
    आपके जज्बात की कद्र करता हूँ।
    लेकिन प्रश्न अपनी जगह पर जरूर है।

    उत्तर देंहटाएं

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