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गुरुवार, 16 जुलाई 2009

‘‘एक दिन स्वप्न साकार हो जायेगा’’ (डॉ रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)


तुम अगर रोज मिलते-मिलाते रहे,

एक दिन स्वप्न साकार हो जायेगा।

मद-भरे मय के प्याले पिलाते रहे,

प्यार का ज़ाम उपहार हो जायेगा।।



मौन हैं शब्द, लब मेरे खामोश हैं,

गन्ध से हो गये भाव मदहोश हैं,

तुम अगर लाज से मुँह छिपाते रहे,

मेरा जीना भी दुश्वार हो जायेगा।

एक दिन प्यार उपहार हो जायेगा।।


मेरा मन है चमन, फूल बन कर खिलो,

खिल-खिलाते हुए, मीत बन कर मिलो,

हुस्न से इश्क को गर रिझाते रहे,

प्रीत में भी, अलंकार हो जायेगा।

एक दिन प्यार उपहार हो जायेगा।।


मेरी नजरों तुम और नजारों में तुम,

हो खिजाओं में तुम और बहारों में तुम,

मेरे आँगन में गर आते-जाते रहे,

सुख का सागर ये परिवार हो जायेगा।

एक दिन प्यार उपहार हो जायेगा।।


7 टिप्‍पणियां:

  1. मेरा मन है चमन, फूल बन कर खिलो,खिल-खिलाते हुए, मीत बन कर मिलो,हुस्न से इश्क को गर रिझाते रहे,प्रीत में भी, अलंकार हो जायेगा।एक दिन प्यार उपहार हो जायेगा।।
    behad sunder bhav,khile khile phool se.sunder manmohini si rachana badhai.

    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत सुन्दर रचना बधाई आपको !

    सादर
    राकेश

    जवाब देंहटाएं
  3. pyar ke rang yun hi khilte rahe
    to mausam yun hi guljar ho jayega
    bhavon mein rang yun hi bharte rahe
    to ek din pyar uphaar ho jayega

    bahut hi bhavmayi,rasbhari ,dil ko lubhati rachna likhi hai.......badhayi.

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत ही सुन्‍दर अभिव्‍यक्ति ।

    जवाब देंहटाएं
  5. मेरा मन है चमन, फूल बन कर खिलो,
    खिल-खिलाते हुए, मीत बन कर मिलो,
    हुस्न से इश्क को गर रिझाते रहे,
    प्रीत में भी, अलंकार हो जायेगा।
    एक दिन प्यार उपहार हो जायेगा।।

    bahut badhiya geet hai.
    badhai

    जवाब देंहटाएं

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