"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

सोमवार, 27 जुलाई 2009

"बहुत जज्बात ऐसे हैं, जिन्हें हम गढ़ नही सकते।" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)


मेरे बहुत से ब्लागर मित्र अपनी पोस्ट में केवल एक शेर ही लगाते हैं।

आज मैंने भी केवल कुछ शेर ही पोस्ट करने का मन बनाया है।

कुछ मित्रों की रचनाओं को टिपियाते-टिपियाते यह छन्द बन गये।


हमें लिखने की आदत है, मगर वो पढ़ नही सकते।

बहुत जज्बात ऐसे हैं, जिन्हें हम गढ़ नही सकते।।


सफीना चलते-चलते ही, भँवर में फँस गया अपना,

उन्हें मिलने की आदत है, मगर हम बढ़ नही सकते।

बहुत जज्बात ऐसे हैं, जिन्हें हम गढ़ नही सकते।।


समर में इश्क के हम तो, बिना हथियार के उतरे,

उन्हें भिड़ने की आदत है, मगर हम लड़ नही सकते।

बहुत जज्बात ऐसे हैं, जिन्हें हम गढ़ नही सकते।।


जरा सी मय को पीकर, वो तो पहुँचे आसमानों में,

उन्हें उड़ने की आदत है, मगर हम चढ़ नही सकते।

बहुत जज्बात ऐसे हैं, जिन्हें हम गढ़ नही सकते।।


12 टिप्‍पणियां:

  1. शास्त्री जी
    टिपियाने पर इतने खूबसूरत छन्द बन गये तो क्या कहने --
    बहुत खूब बने है.

    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत जज्बात ऐसे हैं, जिन्हें हम गढ़ नही सकते...

    waah.. !

    जवाब देंहटाएं
  3. मयंक जी बहुत सुन्दर जज़्वात हैं आपकी हर रचना सुन्दर संवेदना लिये होती है बहुत बहुत बधाई

    जवाब देंहटाएं
  4. वाह आपकी तो बातचीत ही काव्यमयी होता है. बहुत शुभकामनाएं.

    रामराम.

    जवाब देंहटाएं
  5. सब एक से बढ़ कर एक गढ़ लिये आपने तो!!

    जवाब देंहटाएं
  6. अरे वाह ये तो बहुत शानदार शेर बन गये..

    जवाब देंहटाएं
  7. बहुत बढ़िया साहब!
    आपकी बेहतरीन ग़ज़ल से प्रेरित होकर इस नाचीज ने भी एक शे'र कहने की हिम्मत की है.आपका आशीर्वाद चाहूँगा-

    हम अपने दायरे में कैद हैं ये अपनी फितरत है,
    हम अपना दोष दूजे के सिरों पर मढ़ नहीं सकते

    जवाब देंहटाएं
  8. gadhe ji gadhe
    khoob gadhe
    bahut khoob she'r gadhe
    _______BADHAAI !

    जवाब देंहटाएं
  9. aap to mahir hain is vidha ke..........bahut khoobsoorat chhand bamd gaye.

    जवाब देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails