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रविवार, 12 जुलाई 2009

‘‘चलो झूला झूलेंगे’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)





सावन की आई बहार, चलो झूला झूलेंगे।
पड़ने लगी है फुहार, चलो झूला झूलेंगे।।

बागों में कुहु-कुहु, बोले कोयलिया,
जियरा में अगन लगाये बदलिया,
गायेंगे मेघ-मल्हार, चलो झूला झूलेंगे।
पड़ने लगी है फुहार, चलो झूला झूलेंगे।।

मेंहदी रचाओ और गजरा सजाओ,
कजरारे नयनों में, कजरा लगाओ,
चूनर को लेना सँवार, चलो झूला झूलेंगे।
पड़ने लगी है फुहार, चलो झूला झूलेंगे।।

खेतों में धनवा की सोंधी महक है,
तालों में पनिया की चंचल चहक है,
शीतल चलत है बयार, चलो झूला झूलेंगे।
पड़ने लगी है फुहार, चलो झूला झूलेंगे।।

हरी-हरी धरती, हरी-हरी चुडियाँ,
महकी हैं कुड़ियाँ, चहकीं हैं बुढ़िया,
तीजो का आया त्योहार, चलो झूला झूलेंगे।
पड़ने लगी है फुहार, चलो झूला झूलेंगे।।

(चित्र गूगल सर्च से साभार)


21 टिप्‍पणियां:

  1. वाह मजा आ गया आपके झूले में...धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  2. waah waah
    maza aa gaya ......teej ka anand aa gaya .........aapne to sawan ka poora rang geet mein dhal diya.......badhayi.

    उत्तर देंहटाएं
  3. Saawan ka asli maza yahi hai... bahut khub...
    Saadar Pranaam sang badhai sweekaare..

    उत्तर देंहटाएं
  4. वाह वाह ये सावन के झूले देख कर मन बचपन मे चला गया आज कल तो झूला सपना सा ही बन गया है सुन्दर पोस्ट बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  5. शास्त्री जी सावन के झुले को देखने आये बहुत सुंदर लगा, चलिये इन महैलाओ मे हमारा क्या काम राम राम राम

    उत्तर देंहटाएं
  6. jhoole की masti में हम भी jool गए sir............ lajawaab rachna है

    उत्तर देंहटाएं
  7. sir ji,
    savan ka megh - malhar achchha hai.
    mahilaaon ko bahut pasand aayega.

    उत्तर देंहटाएं
  8. शास्त्री जी!
    सावन में झूला गीत बेहतरीन है।
    मुबारकवाद।

    उत्तर देंहटाएं
  9. सावन में झमा-झम बारिस हो जाये तो झूला झूलने में मजा आ जाये।
    बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  10. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  11. आप की इस रचना ने सचमुच सावन का अहसास करा दिया...झूला डाल दिया है...आइये झूला झूलेंगे...

    उत्तर देंहटाएं
  12. मेंहदी लगाओ और गजरा सजाओ,
    कजरारे नयनों में, कजरा लगाओ,
    चूनर को लेना सँवार, चलो झूला झूलेंगे।
    पड़ने लगी है फुहार, चलो झूला झूलेंगे।।

    bahut pyara sa dil ko sarabor karne vaala geet. gahri dubki lagake aap moti nikaal ke laye hain .badhaai!!

    उत्तर देंहटाएं
  13. सावन का मेघ-मल्हार पढ़कर मजा आ गया,
    बधाई!

    उत्तर देंहटाएं
  14. बहुत ख़ूबसूरत लिखा है आपने सुंदर तस्वीरों के साथ! मज़ा आ गया! मुझे तो झूला झुलने में बहुत मज़ा आता है!

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  15. सावन को साकार कर दिया आपने...बधाई...
    नीरज

    उत्तर देंहटाएं
  16. काश की झूलों पर हम भी बैठ पाते
    सावन की मस्ती में हम भी पींग बढ़ाते
    पींग तो बढ़ी जीवन की,बस भागे ही जाता है
    झूला-वूला हुआ नदारद,केवल झाला-झाला है .....

    लेकिन आपकी कविता ने झूलों का आनंद अवश्य दिया है
    बहुत सुन्दर प्रस्तुति...

    उत्तर देंहटाएं
  17. saawan ki ghataa abki baar barsi nahi par achchha hai jhule lag gaye!!

    उत्तर देंहटाएं
  18. सावन के पहले सोमवार को आपकी यह पोस्ट पढ़कर बहुत अच्छा लगा... आभार

    उत्तर देंहटाएं

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