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सोमवार, 6 जुलाई 2009

‘‘जंगल और जीव’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)


रहता वन में और हमारे,
संग-साथ भी रहता है।
यह गजराज तस्करों के,
जालिम-जुल्मों को सहता है।।

समझदार है, सीधा भी है,
काम हमारे आता है।
सरकस के कोड़े खाकर,
(सभी चित्र गूगल सर्च से साभार) नूतन करतब दिखलाता है।।

मूक प्राणियों पर हमको तो,
तरस बहुत ही आता है।
इनकी देख दुर्दशा अपना,
सीना फटता जाता है।।



वन्य जीव जितने भी हैं,
सबका अस्तित्व बचाना है,
जंगल के जीवों के ऊपर,
दया हमें दिखलाना है।
वृक्ष अमूल्य धरोहर हैं,
इनकी रक्षा करना होगा।

जीवन जीने की खातिर,
वन को जीवित रखना होगा।
तनिक-क्षणिक लालच को,
अपने मन से दूर भगाना है।
धरती का सौन्दर्य धरा पर,
हमको वापिस लाना है।।

10 टिप्‍पणियां:

  1. बातो बातो में आपने, बच्चो को पेड़-पोधे, जानवर और जंगल का क्या महत्त्व है समझा दिया.. बहूत खूब...!

    जवाब देंहटाएं
  2. मयंक जी बहुत सुन्दर ढँग से आप कविता के रूप मे बच्चों को अच्छी 2 बातें सिखा रहे हैं बधाई इस सुन्दर कविता के लिये

    जवाब देंहटाएं
  3. वृक्ष अमूल्‍य धरोहर हैं इनकी रक्षा करना होगा, अति उत्‍तम विचारों से सजी इस रचना के लिये आभार्

    जवाब देंहटाएं
  4. @वन्य जीव जितने भी हैं, सबका अस्तित्व बचाना है,जंगल के जीवों के ऊपर,दया हमें दिखलाना है।वृक्ष अमूल्य धरोहर हैं,
    इनकी रक्षा करना होगा।
    .....
    शास्त्रीजी! आपकी बात सोलाह आन्ना सच्च है हमे इस और मिल जुल कर वन एवम वन्य जीवो को बचाना है।

    हार्दिक मगलभावनाओ सहीत
    आभार
    मुम्बई टाईगर
    हे प्रभु यह तेरापन्थ

    जवाब देंहटाएं
  5. बहुत बढ़िया चित्रों के साथ सुन्दर रचना.

    जवाब देंहटाएं
  6. आपकी सीख बच्चे-बूढे सभी समझ जाएँ तो क्या बात है !!

    जवाब देंहटाएं
  7. एक फिल्म काफी अरसा पहले देखी थी उसकी याद आ गयी.

    जवाब देंहटाएं
  8. बहूत खूब खूब.........बच्चो को sabka महत्त्व समझा दिया.. .

    जवाब देंहटाएं
  9. जितनी सुंदर कविता उतनी ही सुंदर तस्वीरें! खासकर मुझे हाथियों वाला तस्वीर बहुत अच्छा लगा!

    जवाब देंहटाएं

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