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मंगलवार, 21 जुलाई 2009

‘‘आँसुओं से ही दामन भिगोते रहे’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

भार हम जिन्दगी का ही ढोते रहे।
आँसुओं से ही दामन भिगोते रहे।।

हाथ पर हाथ रख कर नही बैठे हम,

सुख में हँसते रहे, गम में रोते रहे।
आँसुओं से ही दामन भिगोते रहे।।

कुछ भी आगे नही बढ़ सके राह में,

हादसे दिन-ब-दिन रोज होते रहे।
आँसुओं से ही दामन भिगोते रहे।।

हमने महफिल में उनके तराने पढ़े,

मखमली ख्वाब दिल में संजोते रहे।
आँसुओं से ही दामन भिगोते रहे।।

आँखों-आखों में काटी थी राते बहुत,

वो तो खर्राटे भर-भर के सोते रहे।
आँसुओं से ही दामन भिगोते रहे।।

15 टिप्‍पणियां:

  1. आह..! शास्त्री जी,
    दिलो-दर्द की पूरी शीशी ही उडेल के रख दी आपने तो ! बहुत खूब !!

    जवाब देंहटाएं
  2. शास्त्रीजी,
    इन मखमली ख्वाबों ने ही तो आपको इतना जिंदादिल बना रखा है. सरस रचना ! बधाइयाँ !!

    जवाब देंहटाएं
  3. आँखों-आखों में काटी थी राते बहुत,
    वो तो खर्राटे भर-भर के सोते रहे।
    विसंगतियो को बखूबी संजोया है. बहुत अच्छी रचना

    जवाब देंहटाएं
  4. आँसुओं में ही दामन भिगोते रहे - क्या बात है शास्त्री जी। बहुत अच्छी लगी।

    आँसुओं से भरी जिन्दगी का सफर, है सिखाती हमें नित नये फलसफे।
    यदि जीने की ताकत चुभन से मिले, फिर तो काँटा वही आदतन चाहिए।।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    www.manoramsuman.blogspot.com
    shyamalsuman@gmail.com

    जवाब देंहटाएं
  5. हमने महफिल में उनके तराने पढ़े,
    मखमली ख्वाब दिल में संजोते रहे।
    आँसुओं से ही दामन भिगोते रहे।।
    Adarneeya Shastree jee,
    bahut khoobsuurat panktiyan likhin hai apane .badhai.lekin ek anurodh hai ki yadi aap apane sabhee blogs men hindi men kamment likhane ki suvidha de den to tippaniyan devanagaree men likhana asan ho jayega.
    shubhakamnayen.
    Poonam

    जवाब देंहटाएं
  6. हमने महफिल में उनके तराने पढ़े,
    मखमली ख्वाब दिल में संजोते रहे।
    आँसुओं से ही दामन भिगोते रहे।।
    बेहतरीन .

    जवाब देंहटाएं
  7. are waah,shastri ji..

    bhav ki sampurn vyakhya kar di aapne..
    bada bejod rachan..
    badhayi..

    जवाब देंहटाएं
  8. शास्त्री जी आपकी इस भावपूर्ण कविता ने दिल को छू लिया है!

    जवाब देंहटाएं
  9. aaj to dard ka har rang ek baar mein hi poora utar diya kavita mein...........bahut badhiya.

    जवाब देंहटाएं

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