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गुरुवार, 23 जुलाई 2009

‘‘मौत से सब बेखबर हैं’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)



ब्लॉगर मित्रों!
उच्चारण के 183 दिन के सफर में वैराग्य की यह

300वीं रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ।

आशा ही नही अपितु विश्वास भी है कि

आप सबका स्नेह मुझे आगे भी मिलता रहेगा।


देखते हैं रात दिन शमशान को,

किन्तु कितना मौत से सब बेखबर हैं।

आयेंगे चौराहे और दोराहे कितने,

एक जैसी अन्त में सबकी डगर हैं।।

जिन्दगी में स्वप्न सुन्दर हैं सजाये,

गगनचुम्बी भवन सुन्दर हैं बनाये,

साथ तन नही जायेगा, तन्हा सफर हैं।

किन्तु कितना मौत से सब बेखबर हैं।।


बन्धु और बान्धव मिलाने खाक में ही जायेंगे,

देह कुन्दन कनक सी सब राख ही हो जायेंगे।

चाँद-सूरज फेर ही लेंगे, नजर हैं।

किन्तु कितना मौत से सब बेखबर हैं।।


धार में दरिया की सारी अस्थियाँ बह जायेंगी,

सब तमन्नाएँ धरी की धरी ही रह जायेंगी,

स्वर्ग की सरिता में, कितने ही भँवर हैं।

किन्तु कितना मौत से सब बेखबर हैं।।


18 टिप्‍पणियां:

  1. शास्त्री जी।
    उच्चारण का 183 दिन का सफर बढ़िया रहा।
    इतने कम समय में 300वीं रचना कमाल है।
    आपको 300वीं पोस्ट की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ।
    वैराग्य की रचना उत्त्तम है।
    बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  2. शास्त्री जी।
    300वीं पोस्ट की बहुत-बहुत
    मुबारकवाद।

    जवाब देंहटाएं
  3. 300 वीं रचना के लिए बहुत बहुत बधाई .. इस रचना की जितनी भी प्रशंसा की जाए कम होगी !!

    जवाब देंहटाएं
  4. 300वीं पोस्ट की बहुत-बहुत बधाई!!

    जवाब देंहटाएं
  5. शास्त्री जी , ३०० रचना पूरी होने पर बहुत बहुत बधाई! आपकी हर एक रचना बहुत ही ख़ूबसूरत है और मैं नियमित रूप से पड़ती हूँ! लिखते रहिये और हम पड़ने का लुत्फ़ उठाएंगे!

    जवाब देंहटाएं
  6. bahut badi uplabdhi aapko
    hamare or se hardik badhayi..
    nit nit naye sundar bhavo ke sath aapne blog jagat hi nahi sabhi pathako ka khub manoranjan kiya
    aur achche sikhane yogy baten bhi batayi..isake liye bhi dhanywaad..chahata hoon
    aur nirantar aur unchayion ko chhute rahe aap aapne lekhani ke madhdhyam se..

    जवाब देंहटाएं
  7. 300 vi post gazab ki likh di hai ........jeevan ki satyata ka bodh karati huyi aur jisse hum bekhaab rahte hain ya rahna chahte hain........lajawaab prastuti............aapko hardik badhayi 300vi post ke liye........aap aage bhi aise hi likhte rahein aur jaldi hi 1000vi post likhein.

    जवाब देंहटाएं
  8. ३०० वीं पोस्ट की बधाई !
    आपकी सक्रियता प्रेरणा देती है!
    पुन: बधाई !

    जवाब देंहटाएं
  9. 300वीं पोस्ट की बधाई!
    बढ़िया रचना लगाई है।

    जवाब देंहटाएं
  10. मयंक भइया।
    300वीं रचना कमाल की है।
    300वीं पोस्ट की शुभकामनाएँ।

    जवाब देंहटाएं
  11. मयंक जी!
    बढ़िया पोस्ट लगाई है।
    ३०० वीं पोस्ट की बधाई !

    जवाब देंहटाएं
  12. HI MAUSA JI.
    NICE POST. I LIKE IT VERY MUCH.
    MANY CORGRAT. 300TH POST.

    जवाब देंहटाएं
  13. मयंक जी इतनी बडी उपलब्धी पर बहुत बहुत बधाई लेकिन ऐसे ही बता देने से काम नहीं चलेगा हमारी मिठाई dueरही कमाल है 183 दिन मे 300 पोस्ट नमन आपको और आपकी कलम को आज की रचना भी बहुत सुन्दर है इसके लिये भी बधाआपसे बहुत प्रेरणा मिलती है शुभकामनायें आभार्

    जवाब देंहटाएं
  14. ३०० रचना पूरी होने पर बहुत बहुत बधाई!

    धार में दरिया की सारी अस्थियाँ बह जायेंगी,
    सब तमन्नाएँ धरी की धरी ही रह जायेंगी,
    स्वर्ग की सरिता में, कितने ही भँवर हैं।
    किन्तु कितना मौत से सब बेखबर हैं।।>

    जवाब देंहटाएं
  15. Wah...
    183 din men 300 kee bulandi.
    aapko bahut-bahut badhayee.

    जवाब देंहटाएं

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