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मंगलवार, 14 जुलाई 2009

’’तुम ही मेरा सकल काव्य संसार हो’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)



मेरी गंगा भी तुम, और यमुना भी तुम,
तुम ही मेरे सकल काव्य की धार हो।
जिन्दगी भी हो तुम, बन्दगी भी हो तुम,
गीत-गजलों का तुम ही तो आधार हो।

मुझको जब से मिला आपका साथ है,

शह मिली हैं बहुत, बच गईं मात है,
तुम ही मझधार हो, तुम ही पतवार हो।
गीत-गजलों का तुम ही तो आधार हो।।

बिन तुम्हारे था जीवन बड़ा अटपटा,

पेड़ आँगन का जैसे कोई हो कटा,
तुम हो अमृत घटा तुम ही बौछार हो।
गीत-गजलों का तुम ही तो आधार हो।।

तुम महकता हुआ शान्ति का कुंज हो,

जड़-जगत के लिए ज्ञान का पुंज हो,

मेरे जीवन का सुन्दर सा संसार हो।

गीत-गजलों का तुम ही तो आधार हो।।

तुम ही हो वन्दना, तुम ही आराधना,

दीन साधक की तुम ही तो हो साधना,
तुम निराकार हो, तुम ही साकार हो।
गीत-गजलों का तुम ही तो आधार हो।।

आस में हो रची साँस में हो बसी,

गात में हो रची, साथ में हो बसी,
विश्व में ज्ञान का तुम ही भण्डार हो।
गीत-गजलों का तुम ही तो आधार हो।।

(चित्र गूगल सर्च से साभार)

21 टिप्‍पणियां:

  1. वाग्देवी के लिए एक बेहतर काव्य-पुष्प।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    www.manoramsuman.blogspot.com
    shyamalsuman@gmail.com

    उत्तर देंहटाएं
  2. वीणा वादिनी माँ शारदे को शत-शत नमन....सुंदर आराधना

    उत्तर देंहटाएं
  3. Sir ji.
    mujhe hindi likhna nahi aata lekin aapne vandana bahut achchhi likhi hai.
    badhayee.

    उत्तर देंहटाएं
  4. खूबसूरत वन्दना के लिए,
    मुबारकवाद।

    उत्तर देंहटाएं
  5. सुन्दर काव्य-पुष्प।
    माँ को प्रणाम।

    उत्तर देंहटाएं
  6. मयंक जी!
    बधाई हो!
    माँ के चरणों मेरा नमन।

    उत्तर देंहटाएं
  7. शास्त्री जी!
    मैं भी माँ का भक्त हूँ।
    माँ को श्रद्धा पूर्वक शीश नवाता हूँ।

    उत्तर देंहटाएं
  8. तुम ही हो वन्दना, तुम ही आराधना,
    दीन साधक की तुम ही तो हो साधना,
    तुम निराकार हो, तुम ही साकार हो।
    गीत-गजलों का तुम ही तो आधार हो।।

    bahut pyari vandana!!!!!!

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत सुंदर रचना! माँ के चरणों में मेरा नमन!

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत सुन्दर
    हाथ पकड़े वही , कलम की स्याही वही
    साथ चलती हुई जीवनी-शक्ति का सन्चार हो

    उत्तर देंहटाएं
  11. bahut hi sundar kavyamayi aaradhna hai maa ke charnon mein.........behtreen.badhayi.

    उत्तर देंहटाएं
  12. मा वीणावादिनी के चरनो मे बारम्बार प्राणाम बहुत सौन्दर रचना है बधाई

    उत्तर देंहटाएं

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