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मंगलवार, 10 फ़रवरी 2009

समाजवाद (डॉ0 रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

समाजवाद से-
कौन है अंजाना?
लोगों ने भी यह जाना।
समाजवाद आ गया है,
क्या यह प्रयोग नया है?
डाका, राहजनी, और चोरी,
सुरसा के मुँह के समान-
बढ़ रही है,रिश्वतखोरी।
देख रहे हैं-
गरीब और मजदूर,
होता जा रहा है,
चिकित्सा और न्याय-
उनसे दूर।
बढ़ता जा रहा है-
भ्रष्टाचार, व्यभिचार और शोषण,
नेतागण कर रहे हैं-
अपना और अपने परिवार का पोषण।
क्या समाजवाद-
सबके हित की-आवाज है?
क्या देश में दीन-दुखी,
आम आदमी का राज है?
पछता रहे हैं,
गरीब और कमजोर,
क्यों भेजा था उन्होंने संसद में-
एक निकम्मा और चोर?
आज केवल-
नेता ही आबाद है,
जनता आज भी बरबाद है।
क्या यही समाजवाद है?
यही लोकतंत्र है,
हाँ यही समाजवाद है।

1 टिप्पणी:

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