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गुरुवार, 26 फ़रवरी 2009

खुशियों की सौगात लिए होली आई है (डॉ0 रूपचन्द्र शास्त्री मयंक)

खुशियों की सौगात लिए होली आई है।

रंगों की बरसात लिए, होली आई है।।


रंग-बिरंगी पिचकारी ले,

बच्चे होली खेल रहे हैं।

मम्मी-पापा दोनों मिल कर,

मठरी-गुझिया बेल रहे हैं।

पकवानों को साथ लिए, होली आई है।

रंगों की बरसात लिए, होली आई है।।


जाड़ा भागा, गरमी आई,

होली यह सन्देशा लाई।

कोयल बोल रही बागों में,

कौए ने पाँखे खुजलाई।

ठण्डी कुल्फी हाथ लिए, होली आई है।

रंगों की बरसात लिए, होली आई है।।


सरसों फूली, टेसू फूले,

आम-नीम बौराये हैं।

मक्खी, मच्छर भी होली का,

गीत सुनाने आये हैं।

साथ चाँदनी रात लिए, होली आई है।

रंगों की बरसात लिए, होली आई है।।

10 टिप्‍पणियां:

  1. खुशियों की सौगात लिए होली आई है।
    रंगों की बरसात लिए, होली आई है।।
    अच्छे भाव, सुन्दर गीत।

    जवाब देंहटाएं
  2. बेहतरीन होली गीत।
    होली पर मेरी मुबारकवाद।

    जवाब देंहटाएं
  3. ब्लाग पर प्रतिदिन कुछ न कुछ लिखते हैं।
    सुन्दर गीत के लिए बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  4. आप त्योहारों पर अच्छा लिख रहे हैं।
    बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  5. एक ही दिन में दो-दो होली गीत।
    अच्छा लिखते हैं।
    बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  6. आपकी कलम सशक्त है।
    होली गीत के लिए शुभकामनाएँ।

    जवाब देंहटाएं
  7. शास्त्री जी!
    आपकी सभी टिप्पणियाँ काव्यात्मक होती हैं। जिन्हें पढ़ने में बड़ा आनन्द आता है।
    कृपया इस विधा को जारी रखें। मेरे विचार से कविता में टिप्पणी करने वाले आप अकेले व्यक्ति हैं।

    जवाब देंहटाएं
  8. इस टिप्पणी को लेखक ने हटा दिया है.

    जवाब देंहटाएं
  9. जाड़ा भागा, गरमी आई,
    होली यह सन्देशा लाई,
    कोयल बोल रही बागों में,
    कौए ने पाँखे खुजलाई।
    ठण्डी कुल्फी हाथ लिए, होली आई है।
    रंगों की बरसात लिए, होली आई है।
    वास्तव में होली का माहौल बना दिया इन पंक्तियों ने. आभार.

    जवाब देंहटाएं
  10. Madhari , gujhiya ki baat se to man lalcha diya ji aapane ....Sunad rachana, Dhanywad!

    जवाब देंहटाएं

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