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रविवार, 22 फ़रवरी 2009

।।बाल-गीत।। भैया! मुझको भी, लिखना-पढ़ना, सिखला दो।(डॉ0 रूपचन्द्र शास्त्री मयंक)


भैया! मुझको भी,

लिखना-पढ़ना, सिखला दो।

क.ख.ग.घ, ए.बी.सी.डी,

गिनती भी बतला दो।।


पढ़ लिख कर मैं,

मम्मी-पापा जैसे काम करूँगी।

दुनिया भर में,

बापू जैसा अपना नाम करूँगी।।


रोज-सवेरे, साथ-तुम्हारे,

मैं भी उठा करूँगी।

पुस्तक लेकर पढ़ने में,

मैं संग में जुटा करूँगी।।


बस्ता लेकर विद्यालय में,

मुझको भी जाना है।

इण्टरवल में टिफन खोल कर,

खाना भी खाना है।।


छुट्टी में गुड़िया को,

ए.बी.सी.डी, सिखलाऊँगी।

उसके लिए पेंसिल और,

इक कापी भी लाऊँगी।।

10 टिप्‍पणियां:

  1. वाह शाश्त्री जी बहुत धन्यवाद. सुंदरतम बाल गीत के लिये.

    रामराम.

    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत बढ़िया-प्रेरक बाल कविता है.

    जवाब देंहटाएं
  3. प्रेरणा देने वाला बाल गीत बहुत सुन्दर है।
    बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  4. शास्त्री जी,
    आपने बच्चों पर अपनी अच्ठी कलम चलाई है।
    मेरा दिली-मुबारकवाद कुबूल करें।

    जवाब देंहटाएं
  5. मयंक जी।
    आपका बाल-गीत तो अच्छा है ही,
    साथ में लगा हुआ चित्र भी बहुत अच्छा है।

    जवाब देंहटाएं
  6. बहुत सुंदर और प्रेरणाप्रद बाल गीत के लिए बधाईयाँ !

    जवाब देंहटाएं
  7. भइया मुझे सिखाओ कुछ तुम,
    कुछ मैं तुम्हें सिखाऊँगी!

    मुझे पढ़ाओ तुम हिंदी,
    मैं तुमको गणित पढ़ाऊँगी!

    जवाब देंहटाएं
  8. वाह शास्त्री जी............. बच्चों की रोजमर्रा की दिनचर्या पर भी कविता बना दी आपने............ मजा आ गया

    जवाब देंहटाएं

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