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शुक्रवार, 13 फ़रवरी 2009

प्रेम दिवस के नाम....(डॉ0 रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

सात रंग में, रूप तुम्हारा,

छिपा हुआ है नया-नया।

सावन-भादों मे छायेगा,

रूप तुम्हारा नया-नया।।


सीपों के मोती में पाया,

रूप तुम्हारा नया-नया।

सागर तल में गहरायेगा,

रूप तुम्हारा नया-नया।।


रचा - बसा चन्दा-मामा में,

रूप तुम्हारा नया-नया।

रात चाँदनी में आयेगा,

रूप तुम्हारा नया-नया।।


मलयानिल के झोंको में है,

रूप तुम्हारा नया-नया।

प्रेम-दिवस पर छा जायेगा,

रूप तुम्हारा नया-नया।

12 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर ..अच्छा लिखा है आपने

    जवाब देंहटाएं
  2. मलयानिल के झोंको में है,
    रूप तुम्हारा नया-नया।
    प्रेम-दिवस पर छा जायेगा,
    रूप तुम्हारा नया-नया।

    --वाह!! बहुत खूब!!

    जवाब देंहटाएं
  3. मयंक जी!
    आपने बहुत अच्छा लिखा है-
    मलयानिल के झोंको में है,
    रूप तुम्हारा नया-नया।
    प्रेम-दिवस पर रंग लायेगा,
    रूप तुम्हारा नया-नया।

    जवाब देंहटाएं
  4. रूप तेरा मस्ताना कलम का तेरे मैं दीवाना

    जवाब देंहटाएं
  5. रूप तेरा मस्ताना कलम का तेरे मैं दीवाना

    जवाब देंहटाएं
  6. गन्दी टिप्पणी करने वाले, बेनामी ही होते है।
    भद्दी भाषा के बदले, अभिशापों को ढोते है।

    जवाब देंहटाएं
  7. http://www.youtube.com/watch?v=i2nfIL4zsSM (Link ko copy karke explore par paste karen)

    जवाब देंहटाएं
  8. सॉरी सॉरी सॉरी सॉरी मौसा जी मैं शायरी की कोशिश कर रहा था लेकिन कुछ और ही बन गया मैं अपनी इस गुस्ताखी की क्षमा मांगता हूँ मैं आपका दिल नही दुखाना चाहता था शायरी की कोशिश में बहुत बड़ी गलती हो गई.मुझे आशा है की आप मुझे माफ़ कर देंगे आपका बेटा अनुज कश्यप प्रजापति

    जवाब देंहटाएं
  9. रचा - बसा चन्दा-मामा में,

    रूप तुम्हारा नया-नया।

    रात चाँदनी में आयेगा,

    रूप तुम्हारा नया-नया।।
    " bhut sunder dil ko bhaa gyi..."

    Regards

    जवाब देंहटाएं
  10. इंद्रधनुष-सा रूप तुम्हारा,
    हर पल लगता नया-नया!
    आज तलक उलझा हूँ इसमें,
    और कहीं मैं नहीं गया!

    जवाब देंहटाएं

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